उदयपुर से भगवान प्रजापत।
उदयपुर जिले के पानरवा थाने की डैया पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार पर महिला के साथ छेडछाड करने के आरोप लगने के मामले में पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से की गई कार्यवाही के बाद अब नया मोड आ गया हैं। कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार और एएसआई राजकुमार ने मंगलवार को मीडिया के सामने आकर आरोपों को झूठा बताया। कांस्टेबल जितेन्द्र ने मीडिया को बताया कि आदिवासी शादीशुदा महिला के साथ किसी प्रकार की कोई छेडछाड़ नही की गई। जहर गांव से महिलाओं को गुजरात में बेचने के लिए एक गिरोह कार्य करता हैं। इसमें पूर्व सरपंच बाबू लाल, लालाराम, नानालाल और रमेश नाम का व्यक्ति शामिल हैं। इस गांव से 20 से 25 लड़कियों का बेचा जा चुका हैं। कांस्टेबल ने यह भी बताया कि गुजरात में महिला के पिता के साथ पूछताछ के दौरान एक वीडियो बना लिया जिसमे उसके पिता के द्वारा इस बात को कबूल किया गया कि उसने 60 हजार रूपए में लड़की को बेचा हैं। इस बात का पता चलने के बाद मुझे फंसाया जा रहा हैं। गुमशुदा होने वाली महिला की जांच के लिए आरोप लगाने वाली महिला और उसके माता पिता को जबरन वहां नही ले जाया गया। उनकी मर्जी से वह साथ आए थे लेकिन अब बदनाम करने के लिए महिला और अन्य लोगों के द्वारा साजिश की जा रही हैं। अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई हैं लेकिन वहां से भी केवल आश्वासन मिला हैं हमारी किसी ने कोई मदद नही की।
कुछ ग्रामीण भी आए एएसआई और कांस्टेबल के पक्ष में।
मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कांस्टेबल के पक्ष मे आए गुलजारी नाम के ग्रामीण ने बताया कि कांस्टेबल के द्वारा जिन लोगों को नाम बताया गया। उन पर पहले भी महिलाओं को गुजरात में बेचने के आरोप लग चुके हैं। उसने यह भी कहा कि पूर्व में भावना नाम की महिला जो कि गायब हो गयी थी। इसके अलावा बाबू लाल और लालाराम ने अपने ही परिवार की महिलाओं को भी गुजरात में लाखों रूपए में बेचा।
यह था मामला।
पानरवा थाना की डैया चौकी के एएसआई राजकुमार और कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार के पास 5 साल पहले गुमशुदा हुई एक 26 वर्षीय युवती के मामले की जांच थी। पुलिस को शक था कि गुमशुदा युवती के बारे में शादीशुदा महिला को जानकारी है। महिला ने रिपोर्ट में बताया कि इस शक में उसे और उसके माता-पिता को निजी स्कॉर्पियो में बैठा लिया। यहां से वे उसे गुजरात के विसनगर ले गए। दिनभर तलाश के बाद उसे रात को डैया चौकी लेकर पहुंचे। महिला पुलिसकर्मी नहीं होने के बावजूद महिला को थाने में रहने के लिए मजबूर किया। शाम का खाना बनवाने के बाद कांस्टेबल जितेन्द्र सिंह ने महिला को खुद के कमरे में और उसके माता-पिता को अलग कमरे में सोने को कहा। थोड़ी देर बाद कांस्टेबल जितेन्द्र कमरे में आया और दुष्कर्म करने का प्रयास करते हुए कपड़े फाड़ दिए। चिल्लाने पर उसकी मां वहां पहुंची। इसके बाद कांस्टेबल ने पीड़िता को कमरे से बाहर निकाल दिया और किसी को बताने पर जेल में डालने की धमकी दी।
थाने में झाड़ू-पोंछा कराया।
पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया कि अगले दिन सुबह भी डैया चौकी पर खाना बनवाने के साथ ही झाडू-पोछा करवाया। फिर सुबह उसे निजी कार में गुजरात के विसनगर ले जाया गया। जहां कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार ने उससे कई बार छेड़छाड़ की। शुक्रवार शाम को महिला के परिजनों ने ग्रामीणों को पुलिस की करतूत की जानकारी दी। गांव के पंचों ने एएसआई राजकुमार व कांस्टेबल जितेन्द्र से फोन पर संपर्क किया। बिना महिला पुलिसकर्मी किसी महिला को जांच में ले जाने पर सवाल उठाए तो दोनों पुलिसकर्मी घबरा गए। आनन-फानन में पीड़िता और उसके मां-बाप को मारपीट करने के बाद विसनगर छोड़कर फरार हो गए।

0 टिप्पणियाँ