श्रीगंगानगर से राकेश मितवा।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शारदा कृष्ण ने कहा है कि लोक संस्कृति बहुत विस्तृत है। हमें इससे जुड़े रहना चाहिए। नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए। यह भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।
वे सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम ‘लेखक से मिलिए’ के अंतर्गत महाराजा अग्रसेन विद्या मंदिर सैकेंडरी स्कूल के सभागार में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लोकगीतों को अपनाकर हम अपनी संस्कृति को बचा सकते हैं, क्योंकि राजस्थानी में सोलह संस्कारों के लोकगीत हैं। इससे हम राजस्थानी संस्कृति को बहुत गहराई से समझ सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. शारदा कृष्ण ने अपनी हिंदी व राजस्थानी की कविताएं, गीत और गज़ल प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने जहां संस्कृत भाषा में कालीदास रचित अभिज्ञान शाकुंतम के कुछ श्लोक सुनाए, वहीं ‘मधुशाला’ के राजस्थानी में अनूदित कुछ बंध भी प्रस्तुत किए। उनकी कविताओं ने विशेष ध्यान आकर्षित किया, ‘साजिशें जितनी अंधेरों ने रची, रोशनी दिनों दिन बढ़ती गई...’ और ‘जेठ दुपहरी सा जीवन ये, तुम होते तो सावन होता...।’
डॉ. शारदा कृष्ण ने उपस्थित श्रोताओं के सवालों का भी जवाब दिया और कई विषयों पर प्रकाश डाला। उनसे सवाल करने वालों में डॉ. मंगत बादल, डॉ. श्यामलाल, ऋतुसिंह, मीनाक्षी आहुजा और योगराज भाटिया शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व पार्षद लवीना वर्मा ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की साहित्यिक गतिविधियों से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। उन्होंने कुछ कवियों की कविताओं को भी प्रस्तुत कर वाह वाही लूटी।
विशिष्ट अतिथि आर.डी. बर्मन फैंस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष शैलेंद्र चौहान ने कहा कि शारदा जी की कविताओं में प्रकृति के भाव थे। यह सच है कि लोकगीतों से ही हम अपनी संस्कृति को पहचान पाएंगे। उन्होंने कहा कि वे संगीत से जुड़े हैं और साहित्य एवं संगीत एक-दूसरे के पूरक हैं। इससे पूर्व डॉ. मंगत बादल ने शारदा कृष्ण का परिचय दिया। आभार सृजन के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ताइर ने व्यक्त किया। संचालन सचिव कृष्णकुमार ‘आशु’ ने किया।
कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. नवज्योत भनोत, किरण बादल, सुदर्शन शर्मा, मीनाक्षी आहुजा, ममता आहुजा, मिथलेश सोनी, सुषमा गुप्ता, ऋतुसिंह, ममता पुरी, निष्ठा गुप्ता, अनामिका दाधीच, विजय गोयल, आशीष अरोड़ा, बन्नी गंगानगरी, योगराज भाटिया, द्वारकाप्रसाद नागपाल, अरुण खामख्वाह, सुरेश कनवाडिय़ा, रामधन अनुज, बीएस चौहान, गोविंद गोयल, सत्यपाल जोइया, रामचंद्र गडई, संदेश त्यागी, रमेश कुक्कड़, दिनेश जांगिड़, बनवारीलाल शर्मा और वीरेंद्र खुराना सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।
शारदा कृष्ण को सृजन साहित्य सम्मान।
इस मौके पर डॉ. शारदा कृष्ण को शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक भेंट एवं साहित्य भेंट करके सृजन साहित्य सम्मान दिया गया। किरण बादल, लवीना वर्मा एवं शैलेंद्र चौहान ने उन्हें सम्मानित किया।

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