उदयपुर भगवान प्रजापत।
नीट पीजी काउंसलिंग-2021 में देरी होने से पिछले 9 दिन से हड़ताल कर रहे आरएनटी मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स ने मंगलवार को ज्यादा सख्ती दिखाते हुए सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार कर दिया। इससे पहले आईसीयू सहित इमरजेंसी सेवाए पूर्व की तरह यथावत थी। लेकिन सोमवार को वार्ता के दौरान सहमति नही होने से मंगलवार से यह कदम  उठाया गया। इससे अब इलेक्टिव सर्जरी टालनी पड़ी। हड़ताल से पटरी से उतरी चिकित्सा व्यवस्थाओं के असर से एमबी हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों का आंकड़ा 1400 से घटकर 1 हजार रह गया है। रोज 600 की जगह सिर्फ 100 से अधिक मरीज ही भर्ती हो रहे हैं। हालांकि ओपीडी में अब भी रोज तीन हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। जिन्हे 225 विशेषज्ञ चिकित्सक उपचार उपलब्ध करा रहे हैं।
आउटडोर में बढ़े मरीज।
रेजीडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल के बाद एमबी हॉस्पिटल के आउटडोर में आने वाले मरीजों का सारा भार वरिष्ठ चिकित्सकों पर आ गया हैं। आउटडोर में भी मरीजों की संख्या तीन हजार के पार होने से वहां पर लम्बी लम्बी कतारें लग गयी। मरीजों के साथ साथ वरिष्ठ चिकित्सकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सरकार की अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा हैं मरीजों को।
आठ सूत्री मांगो को लेकर हड़ताल पर उतरे उदयपुर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ नवरत्न शर्मा ने कहा कि सरकार के साथ वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता के दौरान सरकार ने उनकी मांगो को जायज माना लेकिन किसी प्रकार का कोई लिखित आश्वासन नही दिया। सबसे प्रमुख मांग पर भी सरकार का रवैया साफ नजर नही आया। एक बैच के नही होने से 150 डॉक्टरों का अतिरिक्त कार्य 260 रेजीडेंट डॉक्टर्स को करना पड़ रहा था, रोजाना अतिरिक्त कार्य करना रेजीडेंट के लिए मुमकिन नही हो पा रहा हैं। उन्होने इस बात को भी माना कि सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार से मरीजों पर असर पड़ रहा हैं लेकिन कब तक सरकार के नकारात्मक रवैये का शिकार रेजीडेंट होते रहेंगे। 

ये हैं ये आठ सूत्री मांगे ।
नीट पीजी परीक्षा 2021 जिसकी काउंसलिंग केन्द्र व राज्य स्तर दोनो पर होनी है परन्तु आरक्षण संबंधी विवाद के चलते मामला न्यायालय में होने के कारण एक गत्यावरोध की स्थिति आवश्यक सेवा में बनी हुई हैं। स्वास्थ्य सेवायें अति महत्वपूर्ण विषय हैं, केन्द्र सरकार से समन्वय स्थापित कर राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द नीट पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करवाई जाए ताकि गत्यावरोध को समाप्त हो सकें। प्रथम वर्ष के रेजिडेन्ट चिकित्सक न होने एवं कोविड महामारी में अत्यधिक कार्यभार होने के कारण चिकित्सकों की शैक्षणिक गतिविधिया प्रभावित हैं इसलिये एडमिशन बैच 2019/2020 के पेपर प्रजेन्टेशन पोस्टर व थीसिस सम्बधित कार्य में रियायत प्रदान की जाये। रेजिडेन्ट चिकित्सकों को अधिकतर समय में चिरंजीवी व भामाशाह योजना सम्बन्धित कार्य में व्यस्त रखा जाता है जिसका उनकी पाठ्यक्रम/शैक्षणिक गतिविधियों से कोई सम्बन्ध नहीं है, अतः रेजिडेन्ट चिकित्सकों को उक्त कार्य से पूरी तरह मुक्त किया जायें ताकि वो पीडित मरीजों के ईलाज हेतू और अधिक समय दे सके। रेजिडेन्ट की पीजी अवधी पूर्ण होने के कई महीनों के बाद भी वेतन आहरण संबंधी कार्य नियमों की स्वरूपता के अभाव में नही को पाता है जिससे रेजिडेन्ट चिकित्सकों को आर्थिक व मानसिक प्रताडना का सामना करना पड़ता है। सरकार द्वारा समयबद्ध क्रियाविधी की जाए एवं सभी मेडिकल कॉलेज हेतु स्पष्ट निर्देश जारी कर पीजी अवधी से कार्यमुक्त होने के 15 दिन के भीतर सभी अकादमिक कार्य पूरे करवाना सुनिश्चित किया जाये।राज्य सरकार इन सर्विस द्वारा चिकित्सको को केन्द्रीय संस्थान एवं राजस्थान सरकार से इतर संस्थानों में करने से रोकने सबंधी आदेश जारी किये है जो तर्क संगत नही है तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को रोकने जैसा है। उक्त आदेशों को तुरन्त प्रभाव से वापस लिया जाये।सीनियर रेजिडेन्ट ऑफिसर को पीजी उपरान्त तीन इंक्रीमेंट एवं डिप्लोमा उपरांत दो इंक्रीमेंट देने की बात कही हैं लेकिन वर्तमान में आदेश की भाषा की जटिलता अथवा उसके क्रियान्वयन की विसंगती के कारण पीजी को 2 एवं डिप्लोमा को 1 ही इंक्रीमेंट का लाभ मिल रहा है। झालावाड, मेडिकल कॉलेज में 2019 बैच की फीस विसंगति संबंधित मामला लंबे समय से चल रहा हैं। जिसके संबंध में विभिन्न स्तरों पत्र व्यवहार भी किया गया है इसके अंतर्गत 2019 बैच की फीस कम होने के आदेश निकाल कर एक वर्ष पश्चात् रेजिडेन्ट चिकित्सकों के पाँच गुना तक फीस देने के लिए बाध्य किया गया है जो कि किसी भी प्रकार तर्क संगत नहीं है उक्त प्रकरण का निस्तारण करें तथा पुर्नभरण की प्रक्रिया करवाए। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्री व पैरा क्लीनिकल विषय में सीनियर रेजिडेंसी की सीटें नहीं होने के कारण इन विषयों से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले चिकित्सकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हेतू पोस्ट ग्रेजुएशन के पश्चात् एक वर्ष का सीनियर रेजिडेंसी का अनुभव अथवा जिन विषयों में सीनियर रेजिडेंसी नही होती हो उनमें वरिष्ठ प्रदर्शक या टयूटर का अनुभव आवश्यक योग्यता है। राज्य में प्री व पैरा क्लीनिकल विषयों में टयूटर के पद स्थायी है, जिन पर नियुक्ति के पश्चात् पद लंबे समय तक रिक्त नहीं हो पाते है, जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन को पूर्ण कर प्रत्येक वर्ष नये अभ्यार्थी निकलते रहते है। सीनियर रेजीडेंसी के सीटे न होने के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हेतु आवश्यक योग्यता अर्जित नही हो पाती है।