श्रीगंगानगर राकेश मितवा।
आखिर जो सोचा था वही हुआ, भारतीय जनता पार्टी को किसान आंदोलन भारी पड़ गया। श्रीगंगानगर जिले के 9 पंचायत समितियों जिला प्रमुख पद कांग्रेस की झोली में जाना तय हो गया है। सुबह हुए मतदान के लिए नॉमिनेशन में जिला प्रमुख पद के लिए कांग्रेस पार्टी की ओर से एआईसीसी के सचिव कुलदीप इंदौरा ने फॉर्म भरा जबकि सबसे ज्यादा ठोस उम्मीदवारी की संभावना पूर्व सांसद शंकर पन्नू की जताई जा रही थी। केंद्रीय कमेटी के आदेश के आधार पर कांग्रेस पार्टी ने सर्वसम्मति से कुलदीप इंदौरा को जिला प्रमुख के लिए उम्मीदवार बनाया था। वही जिले की नौ अन्य पंचायत समितियों में भी आठ में पूरी तरह से कांग्रेस का प्रभाव रहा और वहां कांग्रेस के प्रधान बनना तय हो गए हैं । सादुलशहर पंचायत समिति में अगर कुछ भाजपा जोड़-तोड़ कर पाई तो भाजपा का प्रधान बन सकता है। अन्यथा जिले की सभी पंचायत समितियों में भी कांग्रेस के प्रधान बनना तय हो गए हैं। श्री गंगानगर पंचायत समिति में कांग्रेस के सुरेन्द्र पाल सिंह ने प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल किया है और उनका प्रधान बनना लगभग तय है। चुनावी विश्लेषण की दृष्टि से देखें तो पूर्व सांसद शंकर पन्नू इस मामले में काफी दुर्भाग्यशाली नजर आए वे पहले भी एक बार जिला प्रमुख पद पर रह चुके हैं पूर्व सांसद भी रह चुके हैं मगर पिछले काफी समय से सक्रिय नहीं रहने के खामियाजा उन को भुगतना पड़ा है ,वहीं केवल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से ही उनकी नजदीकियां ही रही है ,,जबकि कांग्रेस के सेंट्रल कमेटी के नेताओं से उनकी ज्यादा जान पहचान नहीं रही ,ऐसे में कुलदीप इंदौरा का एआईसीसी का सचिव होना तथा मध्य प्रदेश का प्रभारी होना भी उनके लिए काफी फायदेमंद रहा .।
कहना न होगा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब कभी भी अपने ऊपर कोई संकट आया तो उन्होंने हर तरह से अपने आपको अपने साथियों के साथ मजबूत किया जबकि उनके अपने लोगों को जब उनकी जरूरत पड़ी तब वह ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए । पिछले विधानसभा चुनाव में भी राजकुमार गोड़ के अभिन्न रहे अशोक गहलोत ने उनको कांग्रेस की टिकट दिलाने में कोई ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई ,मजबूरन राजकुमार गौड़ को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा और सौभाग्य से जीत भी गए ,मगर मजबूरी में राजकुमार गौड़ ने अपना धर्म निभाते हुए कांग्रेस के साथ रहे। यही हाल शंकर पन्नू का हुआ। शंकर पन्नू की नजदीकियां केवल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से रही, अब जब शंकर पन्नू को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जरूरत पड़ी तो लगता है उन्होंने कोई ज्यादा प्रयास नहीं किए और सारा बोझ अपने कंधे से उतारते हुए केंद्रीय कमेटी पर छोड़ दिया।अनौपचारिक बातचीत में शंकर पन्नू ने कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके सीनियर उनको निराश नहीं करेंगे। मगर हुआ इसके विपरीत।लगभग अपनी जीत के बाद कुलदीप इंदौरा ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम तरह की सुविधाओं किसानों के हितों के लिए सरकार की योजनाओं के तहत लोगों को राहत पहुंचाने की बात कही है।

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