जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के बाद भी रूठने-मनाने का सिलसिला थमा नहीं है। इधर बृजेंद्र ओला राज्यमंत्री बनकर भी नाखुश हैं। वही बसपा से कांग्रेस में आए राजेंद्र गुढ़ा को ईनाम मिला लेकिन बाकी 5 नाराज हो गए। इसी तरह सीनियर दलित नेता भी उपेक्षा से खफा हो गए हैं। विधायकों की नाराजगी को देखते हुए अब लगने लगा है कि गहलोत सरकार को डैमेज कंट्रोल की कवायद करनी ही होगी। दरअसल मंत्रीमंडल का गठन होने के बाद सबसे बड़ी नाराजगी सामने आ रही है उन पांच बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों की, बसपा से कांग्रेस में आए विधायक राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री बनाए जाने से ये बाकी विधायक नाराज हैं। बसपा से कांग्रेस में आए इन पांचों विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें मुख्यमंत्री आवास बुलाया। संभवत उन्हें संसदीय सचिव बनाकर उनकी नाराजगी दूर की जाए। वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीसीसी मे आयोजित बैठक मे अपने संबोधन में यह भी कहा था कि वे बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों और निर्दलीय विधायकों को भुला नहीं सकते हैं। उन्होंने सरकार बचाने के लिए 34 दिन उनके साथ बिताए। जिसके बाद देर शाम 6 विधायकों को तो मुख्यमंत्री ने अपना सलाहकार नियुक्त करते हुए उन्हे ठंडक दे दी। बाकी विधायकों को अब कैसे खुश करते है यह आने वाले समय मे पता चलेगा।