उदयपुर से भगवान प्रजापत।  

कैंसर का नाम सुनने के बाद एक बार ऐसा लगा कि अब जीना मुश्किल हो जाएगा और कुछ ही समय में यह दुनिया छोड़कर ईश्वर को प्यारे हो जाएगें लेकिन डॉ मनोज महाजन के सम्पर्क में आने के बाद उनसे इलाज करवाया तो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से  जंग जीत गये और अब फिर से जीने की इच्छा जागृत हो गयी। यह कहना था कैंसर जैसी घातक बीमारी से उभरने के बाद मरीजों का। कैंसर को कैसे काबू में किया जा सकता हैं इस बारे में जागरूक करने के लिए शनिवार को अरावली फाउंडेशन की ओर से आर्बिट रिसोर्ट में एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें जाने माने विशेषज्ञ डॉ़ मनोज महाजन ने कैंसर को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया और कैंसर के इलाज के बारे में जानकारी प्रदान की। 

सेमिनार के उद्घाटन समारोह में अरावली फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ मनोज महाजन और लोकेश कोठारी उपस्थित रहे। सेमिनार में लेकसिटी के मेडिकल और सामाजिक जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने भाग लिया। कैंसर की नई तकनीकों पर भी चर्चा हुई। शहर के कई कैंसर रोग विशेषज्ञ सेमिनार में मौजूद थे। इस दौरान कैंसर रोग से लड़ने वाले मरीजों ने भी अपनी कहानी बताई कि किस तरह से वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मनोज महाजन ने उनको संभाला और उनको नया जीवन दिया। सेमिनार में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. महाजन ने बताया कि कैंसर को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियांे को दूर करना बेहद जरूरी है। कैंसर भले कष्टदायक बीमारी है, लेकिन समय पर इसका उपचार हो जाए तो रोगी के जीवन को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से इस रोग ने अपना विस्तार फैलाया है, उसकी रोकथाम के लिए भी उतने ही ठोस और कारगर उपाय उपलब्ध हैं। डॉ. महाजन ने कैंसर को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर का नाता अब महिलाओं से ही नहीं है, यह रोग पुरुषों में भी फैल रहा है। पुरुषों में यह रोग वंशानुगत रूप से सर्वाधिक फैलता है। हालांकि बीमारी का समय पर पता चलने पर इसकी रोकथाम की जा सकती है। चिकित्सकीय परामर्श लेकर इससे बच सकते हैं। डॉ. महाजन ने सेमिनार में कैंसर की जंग जीतने वाले सभी मरीजों को बधाई दी। उन्होने कहा कि इस जंग को जीतने में जितनी मेहनत उन्होने की उतनी ही मेहनत मरीज और परिजनों ने की। कीमोथैरेपी के समय जो कठिनाईया आती हैं। उनसे बचने के लिए कई बार लोग कीमोथैरेपी से डरते हैं इसलिए कीमोथैरेपी नही करवाते हैं। उन्होने यह भी कहा कि अब तक निजी संस्थानो के साथ सरकारी हॉस्पिटल में भी कई जगहों पर यह व्यवस्था शुरू हो गयी हैंे।