प्रदेश का धान का कटोरा कहे जाने वाले श्रीगंगाानगर जिले में पानी के लिए आग लगती नजर आ रही है। सबसे पहले किसान आंदोलन से चर्चित हुए घड़साना का किसान राज्य की गहलोत सरकार के खिलाफ उग्र हो उठा है। यहां किसान इंदिरा गांधी नहर परियोजना में चार में से दो समूह पानी की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इसके लिए सहमत नहीं है। यही असहमति अब सरकार के गले में आ गई है।

इस बात पर लंबे समय से आंदोलन कर रहे किसान शनिवार को अपना धैर्य खो बैठे और उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ठप कर दिया। यही नहीं शाम को उनकी पुलिस से जबरदस्त झड़प हुई और उसके बाद देर रात उन्होंने एसडीएम ऑफिस पर ताला जड़ दिया। इसके बाद डीएसपी व एक अन्य पुलिस अधिकारी को बंधक बना लिया। अभी तक दोनों पुलिस के अफसर किसानों के कब्जे में हैं। मामला सुलझ नहीं रहा है और सरकार का कोई मंत्री या बड़ा अफसर फिलहाल मौके पर नहीं पहुंच रहा है।

देर रात हजारों किसानों ने डीएसपी सहित करीब डेढ़ सौ पुलिस के जवानों को बंधक बनाया।
देर रात हजारों किसानों ने डीएसपी सहित करीब डेढ़ सौ पुलिस के जवानों को बंधक बनाया।

एक दिन पहले ही दे दी थी चेतावनी

कई दिन से किसान खेतों में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने की व्यवस्था नियमित किए जाने की मांग कर रहे थे। सरकार पर असर नहीं हुआ तो उन्होंने अंतत: कुछ दिन पहले चेतावनी दे दी थी कि शनिवार को सरकार का कोई भी अफसर व कर्मचारी किसी भी प्रकार का प्रशासनिक काम नहीं कर पाएगा। यानी वे प्रशासनिक व्यवस्थाएं ठप करने को मजबूर होंगे।

फिर वैसा ही हुआ और पुलिस से हुआ आमना-सामना

यह सिर्फ चेतावनी नहीं थी, किसानों ने वैसा ही किया। शनिवार को दफ्तर भले ही बंद थे, लेकिन कानून व्यवस्था और एसडीएम ऑफिस सहित जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप कर दी गई। किसान शाम को एसडीएम ऑफिस में प्रवेश करने पहुंच गए। एसडीएम ऑफिस में प्रवेश करने लगे तो किसानों और पुलिसकर्मियों में जमकर तनातनी हुई। गुस्से में आए किसानों ने गेट पर लगी बैरिकेडिंग तोड़ दी। किसान जब बेरिकेडिंग तोड़ रहे थे तो उठाकर फेंकने की स्थिति में एक पुलिसकर्मी के सिर में जाकर लगी। गनीमत यह रही कि पुलिसकर्मी ने हेलमेट पहना था। इससे उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। मौके पर देर रात 12 से 15 हजार किसान बताए जा रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए यहां भारी पुलिस जाब्ता पहुंचा था।​​

देर रात जड़ा एसडीएम ऑफिस पर ताला

देर रात किसानों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया। उन्होंने एसडीएम ऑफिस के दोनों गेटों पर ताला जड़ दिया और डीएसपी और एक अन्य पुलिस अधिकारी को बंधक बना लिया। फिलहाल इन अफसरों के अलावा करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मी भी एसडीएम ऑफिस में ताले में बंद हैं। इससे पहले शाम को पुलिस कर्मियों से हुई झड़प और एसडीएम ऑफिस में प्रवेश के विफल प्रयास के बाद किसान गुस्से में थे। रात को डीएसपी जयदेव सिहाग करीब डेढ़ सौ जवानों और एक अन्य उच्च अधिकारी के साथ एसडीएम ऑफिस में थे। इसी दौरान किसानों ने ऑफिस के दोनों गेट पर ताला जड़ दिया।

नहीं आने देंगे राशन की कमी, खुद के लिए भी लंगर

किसानों ने घोषणा कर दी कि मांग मानने तक अधिकारी और पुलिसकर्मी एसडीएम ऑफिस में बंद रहेंगे। इस दौरान राशन की कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रशासन चाहे तो पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के लिए भोजन भिजवा सकता है। किसान भी उनके लिए भोजन का प्रबंध कर देंगे। किसी को दवा की जरूरत होगी तो वह भी उपलब्ध करवा दी जाएगी। इस बीच एसडीएम ऑफिस के बाहर हजारों किसानों के लिए लंगर का प्रबंध किया गया।

पुलिस ने बनाया सुरक्षा घेरा
किसान लगातार किसानों को पूरा पानी दाे सहित कई तरह के नारे लगा रहे थे। वे एसडीमए ऑफिस में प्रवेश का हर संभव प्रयास कर रहे थे वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी उन्हें रोकने में जुटे थे। पुलिस ने बाद में लोहे के बैरिकेड्स हटाए और पास-पास खड़े होकर सुरक्षा घेरा बना लिया। किसी भी किसान को सुरक्षा घेरे से आगे नहीं जाने दिया गया। करीब पंद्रह मिनट तक धक्का मुक्की के बाद किसान शांत हुए। बाद में उन्होंने एसडीएम ऑफिस में प्रवेश तो नहीं किया लेकिन बाहर महापड़ाव जारी रखा।

घड़साना में महापड़ाव स्थल की तरफ बढ़ रहे किसान।
घड़साना में महापड़ाव स्थल की तरफ बढ़ रहे किसान।

दोपहर तक पांव रखने की जगह नहीं

पानी की मांग के संबंध में किसान नेता पिछले दो दिनों से गांवों-कस्बों में संपर्क कर रहे थे। उनका कहना था कि वे अब परिवार सहित यहीं डट जाएंगे और पानी लेने के बाद ही उठेंगे। दोपहर तक दस हजार से ज्यादा किसान महापड़ाव में पहुंच चुके थे। किसानों का कहना था कि अगले करीब दस-बारह दिन में उन्हें नहरी पानी नहीं मिल पाया तो गेहूं, सरसों आदि की फसलों की बुवाई पर असर पड़ेगा। ऐसे में पानी किसानों के लिए जरूरी है जबकि सरकार का कहना है कि उनके पास पानी उपलब्ध नहीं है।

घड़साना में बैरिकेडिंग के पास किसान।
घड़साना में बैरिकेडिंग के पास किसान।

शांति बनाए रखने की अपील बेअसर
घड़साना में वर्ष 2004 में भी सिंचाई पानी के लिए उग्र आंदोलन हो चुका है। ऐसे में किसानों के आंदोलन ने सरकारी अधिकारियों की चिंता भी बढ़ा रखी थी। शुक्रवार को जिला कलेक्टर और एसपी ने भी घड़साना के किसान नेताओं से बात कर उनसे शांति बनाए रखने की अपील की थी लेकिन शाम होते-होते यह बेअसर हो गई। किसान नेताओं ने कलेक्टर और एसपी को किसानों की ओर से टकराव की पहल नहीं करने का विश्वास दिलाया था लेकिन शाम को किसान पुलिसकर्मियों से उलझ गए और उनमें जबर्दस्त धक्का मुक्की हुई।

प्रशासन ने किए कड़े सुरक्षा प्रबंध
किसानों के एसडीएम ऑफिस के घेराव की घोषणा के मद्देनजर प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे। इसके तहत 5 कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए थे। पांच सीओ, दस पुलिस थानों के थाना प्रभारी के अलावा एसटीएफ के 75 जवान तथा पुलिस के 450 जवान तैनात किए गए थे।

किसान नेता बोले पानी लेकर ही उठेंगे
एसडीएम ऑफिस के पास चल रहे संयुक्त किसान मोर्चा के महापड़ाव में किसान नेता श्योपत मेघवाल, राजू जाट, एटा सिंगरासर माइनर के राकेश बिश्नोई, सत्यप्रकाश सिहाग आदि ने कहा कि किसान पानी लेकर ही उठेंगे। पानी नहीं मिला तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी। चार में से दाे समूह पानी चलने से ही किसानों की फसले सही तरीके से पनप सकेंगी।

घड़ासाना में भाजपा के महापड़ाव में मौजूद किसान।
घड़ासाना में भाजपा के महापड़ाव में मौजूद किसान।

भाजपा ने भी लगाया महापड़ाव
जहां एक ओर एसडीएम ऑफिस के पास संयुक्त किसान मोर्चा में पानी की मांग पर प्रशासन ठप करने की घोषणा की वहीं भाजपा ने भी पास ही धानमंडी में महापड़ाव शुरू कर दिया है। भाजपा नेता भी चार में से दो समूह पानी की मांग कर रहे हैं। इनके महापड़ाव में भी एक हजार से ज्यादा किसान जुटे थे। यहां विधायक संतोष बावरी, बलवीर लूथरा, रामप्रताप कासनिया, खाजूवाला के विश्वनाथ, पूर्व विधायक शिमला बावरी सहित कई लोग जुटे थे। भाजपा की यह सभा शाम तक शांतिपूर्ण तरीके से चली।

बाजार में अफरा-तफरी
संयुक्त किसान मोर्चा के महापड़ाव के दौरान किसानों के पुलिस से टकराव को देखते हुए घड़साना के मुख्य बाजार में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। यहां कई दुकानदार दुकानें बंद कर घर लौट गए। कस्बे के लोगों में किसानों के आंदोलन को लेकर चर्चा रही।