ब्यूरो रिपोर्ट।

कोयले की कमी के चलते प्रदेश के 7580 मेगावाट क्षमता के चारों थर्मल पावर प्लांट प्लांटों में विद्युत उत्पादन का संकट गहरा गया है। बिजली उत्पादन और मांग में 4000 मेगावाट तक का अंतर आ गया है। ऐसे अप्रत्याशित हालात के बीच कोयला मंत्रालय ने राज्य विद्युत उत्पादन निगम को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आवंटित कोयला खदान से 40% ज्यादा खनन करने की अनुमति दे दी है। आपको बता दें कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम का छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक है। यहां से खनन की रैक 8.33 से बढ़ाकर 11.50 की जाएगी। वर्तमान हालात पर नजर डाले तो कालीसिंध बिजली घर में 1 से 2 दिन का कोयला बचा है। छबड़ा थर्मल पावर में 3 से 4 दिन तक का कोयला बचा है। कोटा थर्मल में दो-तीन दिन का कोयला बचा हुआ है वही सूरतगढ़ प्लांट में भी 2 से 3 दिन का कोयला बचा है। प्रदेश के ऊर्जा सचिव सुबोध अग्रवाल के अनुसार वे कोयला आपूर्ति को सामान्य बनाने के लिए लगातार कोयला मंत्रालय के संपर्क में हैं। केंद्रीय कोल सचिव से भी बातचीत की गई है। इसके बाद छत्तीसगढ़ स्थित परसा ईस्ट और कांता बासन कोल ब्लॉक से अतिरिक्त आपूर्ति की स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने प्रदेश की आम जनता से अपील की है कि आगामी दिनों में अनावश्यक बिजली उपयोग नहीं करें। दूसरी ओर बिजली बचाने के लिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 4 से 5 घंटे की कटौती की जा रही है।