ब्यूरो रिपोर्ट।
जयपुर शहर में लम्बे समय बाद पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव के नेतृत्व में आला अधिकारियों की टीम ने 4 महीने पहले गोपनीय योजना बनाई और उसको शनिवार तड़के 4:00 बजे अंजाम दे दिया। पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारियों के नेतृत्व में लगभग 3000 पुलिसकर्मियों की कई टीमों ने शहर के हिस्ट्रीशीटर और विभिन्न मामलों में वांछित अपराधियों के घर और अन्य ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। पुलिस टीमों ने एक साथ 341 स्थानों पर धावा बोला और इस दौरान 145 आदतन अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। ऑपरेशन गैंगस्टर क्लीन बोल्ड के नाम से चलाए गए ऑपरेशन में बदमाशों के पास से हथियार, मादक पदार्थ और अवैध शराब भी बरामद की गई है। पुलिस ने 21 बदमाशों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए हैं। पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस अभियान की पिछले 4 महीने से तैयारी चल रही थी। अपराधियों की आपस में रंजिश और आम लोगों के मामलों में अपराधियों की सक्रियता की खबरें मिल रही थी। ऐसी शिकायतों के चलते इस ऑपरेशन की तैयारी की गई। पुलिस ने अपराधियों के 68 वाहन भी जब्त किए हैं। पुलिस गिरफ्त में आए 145 बदमाशों में से ज्यादातर अपने इलाके के हिस्ट्रीशीटर हैं, जो हत्या लूट चोरी और कब्जे की वारदातों सहित वसूली भी करते हैं। पुलिस ने आरोपियों से 700 मोबाइल फोन जब्त किए हैं और उनका डाटा खंगाला जा रहा है। पुलिस कार्यवाही की गोपनीयता रखना पुलिस के लिए चुनौती थी। किसी को इसकी भनक नहीं लगे इसलिए अभियान का नाम शुद्ध का युद्ध रखा गया। और तो और इलाके के थाना अधिकारियों भी को भी देर रात तक इसकी सूचना नहीं दी गई। 382 बदमाशों को चिन्हित करने का काम कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच और संबंधित डीसीपी कार्यालय ने किया। पुलिस ने इस अभियान के दौरान उन बदमाशों को भी पकड़ने का लक्ष्य बनाया जो फायरिंग जैसी घटनाओं में लिप्त रहे हैं।
राजकाज को पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस ऑपरेशन की जरुरत इसलिए पड़ी चूँकि कुछ बदमाश पुलिस की मिलिभगत से बचे रहते हैं और अपनी गतिविधियां चलते रहतें हैं। यहाँ तक कि थानों से सेटिंग करने के अलावा वे डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम से भी जुगाड़ बैठा लेते हैं। ऐसे में जब सभी अधिकारीयों की सम्मिलित टीम बनाई जाती है और उन्हें भी अंतिम समय तक असल मकसद नहीं बताया जाता तो वे ना तो संरक्षित आप[आधी को सावचेत कर पाते हैं और ना हे गिरफ्तारी के बाद कोई मदद ही कर पाते हैं। जयपुर धीरे-धीरे महानगर में तब्दील होता जा रहा है ऐसे में जैयर पुलिस कमिश्नरेट को दिल्ली और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली का भी अनुसरण करना चाहिए जहाँ अपराधियों के कद को एक हद से ज्यादा बढ़ने से पहले ही उन्हें कानून के दायरे में ले आया जाता है। मुंबई पुलिस हिस्ट्री शीट खोलने में जरा भी देर नहीं लगाती और इस तरह एक साधारण अपारधी के शातिर बनने का रिकॉर्ड हमेशा उसके पास मौजूद रहता है। जबकि जयपुर में अभी भी आइओ या कांस्टेबल स्तर पर व्यक्तिगत संबंधों के नाम पर अपराधी बचे रहतें हैं। इस अभियान में भी जयपुर पुलिस ने एक बात को नज़रअंदाज़ किया और वो यह कि कई शातिर अपरधियों ने अपने ठिकाने कमिश्नरेट की सीमाओं के पास बना लिए हैं। ऐसे में वे वारदात करने शहर में आकर सुरक्षित अपने ठिकानों पर तुरंत पहुँच जाते हैं। अब जरुरत है मुहाना, खोरा बीसल, चौमूं, बस्सी महलां और कूकस जैसे इलाकों में सघन सर्वे की जिससे वहां आराम से समय काट रहे अपराधियों को भी कानून के दायरे में लाया जा सके।

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