नागौर से शबीक उस्मानी की रिपोर्ट।
राजस्थान पुलिस में नियम है कि इंस्पेक्टर से लेकर ऊपर के तमाम पुलिस अधिकारी अपने गृह जिले में तैनात नहीं किए जा सकते। लेकिन सब इंस्पेक्टर से नीचे के जो भी पद हैं वह गृह जिले में तैनात रह सकते हैं यानी कि कांस्टेबल हेड कांस्टेबल और एएसआई। नियम में इस ढील का गलत फायदा उठाया जा रहा है वह भी आज से नहीं बरसों से। कांस्टेबल ,हेड कांस्टेबल और एसआई में गृह जिले का ऐसा शौक है, यह लोग जिले से बाहर पद स्थापित होना ही नहीं चाहते। इसके लिए हर वह तरीका अपनाया जाता है जो इनकी पोस्टिंग जिले से बाहर ना होने दे । यह कहानी नागौर जिले की नहीं बल्कि प्रदेश के हर जिले की है जहां की पुलिस कार्मिकोंL में अपने गृह जिले में रहने का शौक इस कदर हावी है कि पुलिसिंग का जो फर्ज है वह उसको निष्ठा पूर्वक नहीं निभा पाते। बात नागौर जिले की करें तो यहां नेताजी की डिजायर और फोन कॉल, सिस्टम पर इस कदर हावी है कि गृह जिले में रहने का मोह रखने वाले पुलिसकर्मियों की पौ बारह है। जिले के कई थानों में कॉन्स्टेबल , हेड कांस्टेबल और एएसआई बरसों से जमे हैं क्योंकि उन पर नेताजी की कृपा जो है। प्रदेश भर में पुलिस महकमे में ट्रांसफर और पोस्टिंग में नेताजी की डिजायर रामबाण का काम करती हैं । ट्रांसफर और पोस्टिंग देते समय बड़े साहब, नेताजी की डिजायर का ख्याल ना करें तो बात बिगड़ भी सकती है ऐसे में डिजायर वाले पुलिसकर्मियों को वही पोस्टिंग मिल जाती है जहां कि वह चाहत रखते है । गृह जिले में पोस्टिंग का मोह रखने वाले पुलिसकर्मियों के लिए यह बात भी कही जा सकती है ,की इससे राजस्थान पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। इस बारे में नागौर जिला पुलिस अधीक्षक अभिजीत सिंह ने, राजस्थान पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर होने की बात मानते हुए इस पर अफसोस भी जताया।प्रदेश में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जो कार्रवाइयां होती रही है उनमें ट्रेप होने वालो में राजस्थान पुलिस के कार्मिकों की संख्या भी कम नहीं होती । इससे साबित होता है कि राजस्थान पुलिस, भ्रष्टाचार में कीर्तिमान बना रही है । कुचामन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गणेशाराम का कहना है की गृह जिले में ट्रांसफर पोस्टिंग राजस्थान पुलिस के किसी भी कार्मिक को ना मिले यह नियम होना चाहिए । इससे पुलिस अधिकारियों पर दबाव नहीं रहेगा जब वह स्थानांतरण की सूची जारी करेंगे ना ही डिजायर सिस्टम हावी होगा । उन्होंने बताया कि डिजायर सिस्टम पुलिसिंग के लिए घातक साबित हो रहा है । इस बारे में सबको सोचने की जरूरत है कि कैसे राजस्थान पुलिस की खराब होती छवि को दुरुस्त किया जाए और पुलिसकर्मी, जिस फर्ज को अंजाम देने के लिए पुलिस की नौकरी ज्वाइन करते है वह उस फर्ज को सही तरीके से अंजाम दे । जानकारी के मुताबिक नागौर जिला मुख्यालय से तेजस्विनी टीम को दो भागों में विभाजित कर एक टीम को शिक्षा नगरी कुचामन में तैनात किया जाना है इसके लिए नागौर जिला पुलिस अधीक्षक अभिजीत सिंह ने आदेश भी जारी कर दिए । इसके बाद भी तेजस्विनी टीम की सदस्य कुचामन में तैनात नहीं हुई है । सूत्रों के मुताबिक इसकी वजह डिजायर सिस्टम ही है। जिन महिला पुलिस कार्मिकों को कुचामन में तेजस्विनी टीम सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया वे नेता जी की शरण में चली गई और नेता जी की कृपा से अब तक उनकी तैनाती नागौर से कुचामन नहीं हो पाई है। लेकिन क्या यह फैक्ट बिल्कुल सही कहा जा सकता है की पुलिस कर्मी के गृह जिले में तैनात होने से भ्रष्टाचार बढ़ता है। क्योंकि जो पुलिस अधिकारी चाहे वह इंस्पेक्टर हो या फिर वृत्त अधिकारी या और कोई बड़ा अधिकारी ,जो अपने जिले या राज्य से बाहर कार्यरत है क्या वह भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है।

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