हनुमानगढ़ से विश्वास कुमार की रिपोर्ट।

केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद भी हनुमानगढ में धान की सरकारी खरीद का मामला सुलझता नजर नही आ रहा है। स्थानीय स्तर पर धान की खरीद में राज्य सरकार द्वारा पूर्व ही लेटलतीफी की गई और केंद्र सरकार को अनुशंसा पत्र लिखने तक मे 3 माह लगा दिए।

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 जिसके चलते करीब 40 प्रतिशत फसल बाजार में आ गई और किसानों ने फसल को ओने-पौने दामों में बेच दिया।लेकिन अभी भी बची फसल की खरीद शुरू नही हो रही है।हलांकि खरीद को लेकर प्रशासन व किसान नेताओं के बीच कई दौर की विफल वार्ता भी हो चुकी है।लेकिन जहां किसानों की मांग है कि शीघ्र-अतिशीघ्र धान की सरकारी खरीद शुरू हो क्योकि पहले ही किसानों को काफी नुकसान हो चुका है।वही जब जिला कलेक्टर से बात की तो उनका कहना है कि खरीद नवम्बर के पहले सप्ताह में ही शुरू हो सकेगी।जिस पर आक्रोशित किसानों ने राज्य सरकार व प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और हनुमानगढ जिला कलक्ट्रेट पर महापड़ाव दिया है और कलक्ट्रेट के दोनो गेटों पर धरना लगा दिया है। जिससे कलक्ट्रेट में रूटीन के काम आने वाले लोगबाग परेशान हो रहे है। वही कुछ किसानों ने अपनी धान की फसल कलक्ट्रेट के सामने सड़क पर रखी है। किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है की महापड़ाव तब तक जारी रहेगा जब तक प्रशासन धान की सरकारी खरीद शुरू नही करवा देता है और प्रशासनिक अधिकारी को ना अंदर जाने दिया जाएगा ना बाहर वही पड़ाव में आये किसानों के लिए किसान नेता राजनीतिक जलेबियां तलते नजर आये।

ये है धान का गणित

हनुमानगढ़ तहसील के 15, पीलीबंगा के 12, टिब्बी के 20 और रावतसर के 5 गांवों में किसान धान की बुवाई करते हैं,प्रति हैक्टेयर धान की पैदावार औसत 60 क्विंटल होती है। पराली की मात्रा भी धान के बराबर ही मानी जाती है। वर्ष 2020-21 में 36 हजार 950 हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई और 22 लाख 17 हजार क्विंटल पैदावार हुई।