चित्तौड़गढ़ में वकालत शुरू करने वाले फरजंद अली राजस्थान उच्च न्यायालय के जज के रूप में नियक्त किए गए।
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फरजंद अली के परिवार में तीन पीढ़ियों से वकालत की जा रही है। उनके दादा, पिता, भाई सभी एडवोकेट हैं। 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इनका नाम की सिफारिश भेजी थी लेकिन उस समय इन्हें नियुक्त नहीं किया गया था। लेकिन 2021 में फिर से इनका नाम भेजने के बाद फरजंद अली को जज नियुक्त कर लिया गया।
चित्तौड़गढ़ में 15 दिसंबर 1968 में पैदा हुए फरजंद अली शुरुआती दिनों में यही से अपनी पढ़ाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने 1992 में अपनी वकालत शुरू की। 2005 में वे जोधपुर हाई कोर्ट चले गए। वहां रहकर उन्होंने वकालत की और सोमवार को उन्हें जज के रूप में नियुक्त किया गया।
तीन पीढ़ियों से चली आ रही है वकालत
फरजंद अली के दादाजी सैयद मुबारक अली ने चित्तौड़गढ़ से वकालत शुरू की। 1954 में मृत्यु के समय उनके पिता दौलत अली मात्र 11 साल के थे। दादा के दोस्तों के साथ उनके पिताजी भी रोज कोर्ट जाने लगे। छोटी सी उम्र में उन्हें कोर्ट से काफी जानकारियां मिलने लगी। फिर दौलत अली एलएलबी करने के बाद 1986 में अपनी वकालत शुरू कर दी। विरासत में मिली वकालत में फरजंद अली और उनके छोटे भाई इनायत अली ने भी वकालत शुरु कर दी। फरजंद अली 1992 तो इनायत अली ने 1999 से एडवोकेट की भूमिका निभाई।
पिता कोर्ट में कर रहे थे वकालत, फोन आया कि बेटा न्यायाधीश बन गया
फरजंद अली के पिता दौलत अली आज भी एक्टिव है और कोर्ट में पेशी करते हैं। फरजंद अली के पिता दौलत अली ने इस बात की खुशी जताई कि आज भी जब वो कोर्ट में पेशी कर रहे थे, उसी दौरान कॉल आया। जब फ्री होकर फोन किया तो पता चला कि उनके बेटे हाई कोर्ट में न्यायाधीश बन गए। फरजंद अली का बेटा जीशान अली भी मुंबई में रहकर वकालत की ही पढ़ाई कर रहे हैं। फिर वकीलों से लेकर न्यायाधीशों तक ने पिता को बेटे के जज बनने पर बधाइयां दीं।

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