झालावाड़ से हरिमोहन चोडॉवत की विशेष रिपोर्ट।

झालावाड जिले के झालरापाटन कस्बे के इन्दौर रोड पर रावण के परिजनो के पत्थर के बुत बने हुए है एवं इन बुतो के आगे दशहरे के दिन रावण का पुतला बनाकर दहन किया जाता है। 

यह परंपरा आज की नही बल्कि 1840 मे शुरू किया था। झालावाड राज्य के प्रथम महाराज राणा मदनसिंह ने इन्होंने झालरापाटन मेंला मैदान में रावण के कुनबे का निर्माण कराया तब से यहां दशहरा मनाया जाता है। पहले पत्थर के पुतले को ही तीर मारकर रावण वध किया जाता था।


रावण के पेट में लाल थैली रख कर उसमे तीर चलाते थे इसके बाद 1920 में राणा भवानीसिंह ने रावण के परिवार का जीर्णोद्धार  कराया और पत्थरो से पूरा परिवार का निर्माण कराया। इसके बाद से ही यहां साल भर लोगो के लिए खड़ा मिलता है यह परिवार इसके बाद लगातार यहां नगरपालिका इन रावण परिवार की देखभाल करती है इनका रंग रोगन साफ सफाई करवाती है और दशहरे के दिन यहां दशहरा मनाया जा रहा है।दिन बदले जमाने बदले अब बदल गया है रावण आज भी लोग यहां रावण परिवार को देखने आते है और पूजा अर्चना कर मन्नत भी मांगते है यहां आपको बता दे, कि रावण के परिवार में रावण, मंदोदरी, कुम्भकर्ण,सुरपर्णखा पहरेदार और हाथी भी मौजूद है जो भी लोग इस रोड से गुजरते हे रावण परिवार को देखकर अचरज मे पड जाते है। वहीं रावण दरबार में काम करने वाले बबलू मुस्लिम परिवार वाले भी पिछले तीन पीढ़ियों से इनका रंग कलर कर रहे हैं। मुस्लिम परिवार वाले होते हुए भी यह लोग रावण दरबार के परिवार से काफी खुश है और खुशी-खुशी अपने काम को अंजाम देते हैं।