जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।

बीएसपी से कांग्रेस में शामिल होने वाले छह में से चार असंतुष्ट विधायकों ने अब अपना वापस से मन बदल लिया है। विधायकों का नाराजगी तेवर अब नरम पड़ चुका हैं। दो दिन से दिल्ली में डेरा जमाए विधायक सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देने के लिए कानूनी राय लेने की बात कह रहे हैं। एक दिन पहले चार विधायक दिल्ली पहुंचे थे। विधायकों के तेवर तल्ख और सख्त थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नये संदेश के बाद अब चारों विधायकों के सुर बदल गए हैं। चारों विधायकों ने सीएम गहलोत के प्रति फिर से निष्ठा दिखाने के बयान जारी  करना शुरू कर दिया है ।बीएसपी से कांग्रेस में आए विधायक राजेंद्र गुढ़ा, संदीप यादव, लाखन सिंह और वाजिब अली ने एक दिन पहले नाराजगी जाहिर की थी। चारों विधायक नाराज बताए जा रहे थे। इन विधायकों ने यहा तक कह दिया था कि हमारी प्राथमिकता सदस्यता बचाने की है। हम किसी भी कीमत पर सदस्यता नहीं खोना चाहते। इसके लिए हम किसी से भी मिलने को तैयार हैं। इस बयान के एक दिन बाद ही चारों विधायक नरम पड़ गए हैं। 

सीएम गहलोत ने की बात।

नाराज होकर दिल्ली गए चारों विधायकों से सीएम गहलोत ने बात की। मुख्यमंत्री से बात करने के बाद अब विधायकों के सुर बदल गए हैं। चारों विधायकों से उनकी नाराजगी का कारण पूछा, विधायकों ने अपनी सदस्यता जाने की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में नामी वकील से कानूनी सहायता और पैरवी की व्यवस्था करवाने को कहा। इन विधायकों ने सरकार में भगीदारी की भी मांग रखी है। चारों असंतुष्ट विधायकों ने अब सीएम गहलोत के साथ होने की बात कही है। बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक लाखन सिंह कटकड ने कहा कि चारों विधायकों की मुख्यमंत्री से फोन पर बात हुई है। हम सरकार को स्थिर करने के लिए  बीएसपी से कांग्रेस में आए थे। चारों विधायकों ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के जवाब के लिए अधिवक्ताओं से बातचीत की है। शनिवार तक जयपुर लौट आएंगे। विधायक लाखन का कहना है कि दिल्ली आए हैं तो नेताओं से मुलाकात तो होगी ही। विधायक राजेंद्र गुढा ने कहा कि हम सरकार के साथ हैं और कहीं भी नहीं जा रहे।

दो विधायक दिखे अलग।

बीएसपी से कांग्रेस मे आए विधायक भी दो फाड़ दिखे। छह में से दो विधायक जोगिन्द्र सिंह अवाना और दीपचंद खेरिया दिल्ली नहीं गए। इन दोनों विधायकों ने मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाकात करके अपनी बात रखी। असंतुष्ट चारों विधायक दिल्ली चले गए। विधायकों ने जब सार्वजनिक बयानबाजी शुरू की तब रातों रात डैमेज कंट्रोल शुरू किया गया। छह  बीएसपी विधायकों ने सितंबर 2019 में कांग्रेस में विलय किया था। विलय के दूसरे ही दिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने 6 विधायकों के बसपा से कांग्रेस में शामिल होने को मंजूरी दे दी।  बीएसपी ने 6 विधायकों के विलय को गैर कानूनी ठहराते हुए दल बदल निरोधक कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में पिछले डेढ़ साल से यह मामला चल रहा है। तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन 6 विधायकों से चार सप्ताह में फाइनल जवाब पेश करने को कहा है। 25 अक्टूबर से पहले इन विधायकों को सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश करना है। अगर जवाब पेश नहीं किया तो सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना देगा। इनका मामला सुप्रीम कोर्ट में फाइनल स्टेज पर है। ये विधायक यह केस हार जाते हैं तो इनकी विधायकी तो जाएगी ही, छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य भी हो जाएंगे।

सीएम गहलोत के नजदीकी हैं चारों विधायक।

असंतुष्ट चारों विधायक मुख्यमंत्री के नजदीक माने जाते हैं, पिछले दो साल से बीएसपी से कांग्रेस में आने वाले विधायक सरकार में पद देने का इंतजार कर रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट का नोटिस और मंत्रिमंडल फेरबदल में लगातार हो रही देरी के बाद इन विधायकों का अब धैर्य जवाब दे रहा है। विधायकों को सरकार की ओर सरकार को इन विधायकों की जरूरत है। इसलिए ये विधायक एक लाइन से बाहर नहीं जाते। इस बार भी ऐसा ही किया। 

राजेंद्र गुढा पहले भी जता चुके हैं नाराजगी।

बीएसपी विधायकों की अगुवाई करने वाले राजेंद्र गुढा इससे पहले भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि बीएसपी से कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों के अधिवक्ता के रूप में मनु सिंघवी पैरवी कर रहे थे। लेकिन बीच में क्या कुछ हुआ।  सिंह ने सही ढंग से पैरवी नहीं की और उनकी स्थिति कमजोर हो गई। अब फिर से सीएम गहलोत ने कमान संभाली है और सुप्रीम कोर्ट में सही तरीके से जवाब देने के लिए कपिल सिब्बल या किसी अन्य से बातचीत की जा रही है। इनका भारी-भरकम खर्चा कौन करेगा इसको लेकर भी विधायकों में चिंता है। फिलहाल स्थिति में बदलाव आ गया है और वह सीएम गहलोत ने फिर से समर्थक हो गए हैं और उन्होंने बयान जारी करते हुए बताया है कि हम सीएम गहलोत में विश्वास रखते हैं।