ईकॉमर्स कंपनी अमेजॉन को भरतपुर निवासी एक उपभोक्ता को 10 हजार रुपए बतौर हर्जाने के देने होंगे। साथ ही मोबाइल की कीमत ब्याज सहित लौटानी होगी। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को इस संबंध में आदेश जारी किया है। प्रकरण के अनुसार राजेन्द्र नगर निवासी हितेश सिंह रघुवंशी ने अमेजॉन से सितंबर 17 में लेनेवो नोट 8 मोबाइल खरीदा। इसके लिए 13998 रुपए का नेटबैंकिंग से भुगतान कर दिया।

कंपनी की ओर से भेजा गया मोबाइल सही तरीके से काम नहीं कर रहा था। मोबाइल लौटाने के लिए संपर्क किया तो उसे विक्रेता राकेट कॉमर्स को कोरियर से वापस भेजने की बात कही। इस पर उपभोक्ता ने स्पीड पोस्ट से मोबाइल लौटा दिया। कंपनी ने चार दिन में रकम लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन लौटाई नहीं। फिर से संपर्क करने पर बताया गया कि मोबाइल पैक खो गया है। जिसे तलाश किया जा रहा है। पांच-छह दिन बाद कहा गया कि भेजा गया बॉक्स खाली था। ऐसे में जांच कर रकम लौटाई जाएगी।

अंत में नवंबर में रकम लौटाने से इंकार कर दिया गया। इस पर पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। आयोग के तलब करने पर कंपनी ने सफाई दी वह केवल ऑनलाइन प्लेटफार्म है। विक्रेता द्वारा बेचे गए उत्पाद के लिए उत्तरदायी नहीं है। वह केवल रकम लेकर विक्रेता के खाते में हस्तांतरित करता है। खाली पैकेट प्राप्त होने के कारण रिफंड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। मामला धोखाधड़ी से संबंधित होने के कारण आयोग इस केस की सुनवाई नहीं कर सकता।

दोनों पक्षों सुन आयोग अध्यक्ष सत्यजीत राय और सदस्य दीपक मुदगल ने फैसला किया। जिसके अनुसार कंपनी के कहे अनुसार ग्राहक ने विक्रेता को मोबाइल वापस भेजा था। कंपनी की ओर से जांच कराई गई इसका कोई सबूत नहीं पेश किया गया। ना ही ऐसा कोई सबूत पेश किया जिससे साबित हो कि खाली बॉक्स प्राप्त हुआ था। ग्राहक को सूचित भी काफी लंबी अवधि बाद किया गया। कंपनी ने रकम नहीं लौटाकर अनुचित व्यापार पद्धति अपनाई।