ब्यूरो रिपोर्ट।
राजधानी जयपुर के ग्रामीण क्षेत्र बगरू में थाना अधिकारी के पद पर तैनात रतनलाल आपके नाम के अनुरूप ही अनमोल रत्न निकले। उन्होंने रिश्वत लेने की परंपरा में अनूठा इजाफा करते हुए तकियों की भी मांग कर दी और 4 तकिए ले भी लिए। थाने में दर्ज परिवाद को रफा-दफा करने की एवज में ₹50000 की मांग की गई थी। सौदा 25000 में तय हुआ, 15000 पहले ले लिए थे और गुरुवार को जैसे ही बाकी के दस हजार और तकिए प्राप्त किए तो तुरंत एसीबी ने उनको अपनी गिरफ्त में ले लिया। एसीबी को देखते हुए रतनलाल ने रिश्वत की राशि दीवार पर लगे बोर्ड के पीछे छिपा दी और घूस लेने से मुकर गया। लेकिन एसीबी रतनलाल की सोच से एक कदम आगे निकली और बोर्ड के पीछे रखी राशि डूंढ ली। दरअसल बगरु थाने के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कोरोना काल दौरान रकम लेने के बावजूद माल सप्लाई नहीं करने पर परिवाद दर्ज हुआ था। इसके बाद थाना इंचार्ज ने फैक्ट्री मालिक को बुलाया धमकाया और फिर ₹50000 की घूस मांगी, लेकिन फैक्ट्री मालिक ने हालात नहीं होने पर 25000 की रकम देनी स्वीकार की थी। इसके बावजूद थानाधिकारी के बार-बार धमकाने पर उसने एसीबी को शिकायत कर दी। शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी एक्शन में आई और रतनलाल एसीबी की गिरफ्त में आ गए। आपको बता दें कि इससे पहले भी सन 2014 के दौरान रतनलाल मानसरोवर थाने में तैनात था। उस दौरान भी एक ज्वैलर से रिश्वत मांगने के मामले में इस की संदिग्ध भूमिका पाई गई थी।

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