श्रीगंगानगर शहर का नया मास्टर प्लान 2017-2035 लंबे समय की प्रतीक्षा के बाद आखिर मंगलवार काे सार्वजनिक कर दिया गया। नगर नियाेजक विभाग, जयपुर के अतिरिक्त मुख्य नगर नियाेजक (पश्चिम) सुभाषचंद्र शर्मा की ओर से श्रीगंगानगर सहित प्रदेश के 197 निकायाें के लिए मास्टर प्लान काे टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट अर्बन डवलपमेंट एंड हाउसिंग गवर्नमेंट ऑफ राजस्थान की साइट पर अपलाेड किया जा चुका है।
साइट से संबंधित क्षेत्र के मास्टर प्लान का नक्शा व जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वर्ष 2035 तक शहर की जनसंख्या 5,45,000 हाेने की संभावना है। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार श्रीगंगानगर की जनसंख्या 2,37,784 बताई गई है। वर्ष 2017 के विद्यमान भू उपयाेग सर्वे के अनुसार श्रीगंगानगर का विकसित क्षेत्र 2741 हैक्टेयर है। शहर में 13 कच्ची बस्तियां व 45 पार्क हैं।
शहर में पानी के 18 ओवर हैड टैंक एवं 8 सीडब्ल्यूआर हैं। शहर में जलापूर्ति साधुवाली हैड व नाथांवाली से की जा रही है। श्रीगंगानगर के मास्टर प्लान के प्रारूप का प्रकाशन 11 दिसंबर 2019 काे किया गया था। जिस पर 930 आपत्तियां शहरवासियाें द्वारा दर्ज करवाई गई थी। सभी आपत्तियाें काे देखते हुए कुल 13 आवश्यक संशाेधनाें काे समाहित कर नया मास्टर प्लान 2035 तैयार किया गया। यूआईटी सचिव डाॅ. हरीतिमा का कहना है कि मास्टर प्लान 2035 मिला है। इसी अनुरूप अब आगे काम किया जाएगा।
सरकारी वेबसाइट पर भी अपलोड...रीको के पास औद्योगिक गतिविधियां होंगी, शहर के पास ईंट भट्ठे व उद्योग स्थानांतरित किए जाएंगे
1. मिश्रित भू-उपयोग, प्रमुख सड़काें के सहारे कुल 621 हैक्टेयर भूमि पर मिश्रित भू उपयाेग हाे सकेगा : हनुमानगढ़ मार्ग पर चहल चौक से बाइपास तक, सूरतगढ़ रोड पर कृषि उपज मंडी से हनुमानगढ़-पदमपुर बाइपास तक, पदमपुर रोड पर गाेशाला से बाइपास तक सड़क के एक ओर (पूर्वी दिशा में), सुखाड़िया सर्किल से गंग कैनाल तक सड़क के दोनों तरफ, जिलाधीश कार्यालय परिसर की भूमि पर, राष्ट्रीय राजमार्ग 62 व हनुमानगढ़ रोड जंक्शन के उत्तर-पूर्वी भाग व दक्षिणी भाग में व आसपास के क्षेत्र में प्रमुख सड़कों के सहारे कुल 621 हैक्टेयर भूमि पर मिश्रित भू-उपयोग प्रस्तावित किया गया है। हनुमानगढ़- पदमपुर बाइपास के दोनों ओर एवं सूरतगढ़ बाइपास रोड के दोनों ओर क्रमशः 200 मीटर चौड़ाई में मिश्रित भू-उपयोग प्रस्तावित किया गया है।
2. औद्याेगिक- 385 हैक्टेेयर भूमि औद्याेगिक उपयाेग के लिए प्रस्तावित : वर्तमान में हनुमानगढ़ रोड पर चक श्याम सिंहवाला में विद्यमान रीको औद्योगिक क्षेत्र 143 हैक्टेयर है। इस औद्योगिक क्षेत्र के लगते हुए दक्षिण दिशा में औद्योगिक उपयोग के लिए 242 हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि प्रस्तावित की गई है। इस प्रकार कुल 385 हैक्टेयर भूमि औद्योगिक उपयोग के लिए प्रस्तावित की गई है। शहर के मध्य में स्थापित औद्योगिक इकाइयों को जो कार्यरत नहीं है अथवा जिनमें भारी वाहनों का आवागमन बना रहता है, उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त शहर के मध्य चल रहे उद्योग, चूने एवं ईंट के भट्टे जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, को वहां से स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है।
3. उद्यान पर्यटन काे बढ़ावा दिया जाएगा : शहर में कुल 45 पार्क हैं। मास्टर प्लान 2035 में सभी प्रस्तावित आवासीय क्षेत्राें में पार्क, खुले स्थल एवं खेल मैदान के लिए स्थल प्रस्तावित किए गए हैं। इस उपयाेग के लिए रीकाे औद्याेगिक क्षेत्र के समीप लगभग 62 हैक्टेयर भूमि पर पार्क प्रस्तावित किया गया है। हनुमानगढ़-पदमपुर बाइपास के दक्षिण एवं सूरतगढ़ राेड के पश्चिम में 14 हैक्टेयर भूमि पार्क, खुले स्थल के लिए दर्शायी गई है। इसी तरह शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिल्पग्राम, ग्रामीण हाट, तकनीकी पार्क आदि विकसित किए जाने आवश्यक हैं। पर्यटन सुविधा के अंतर्गत श्रीगंगानगर के पूर्व मास्टर प्लान-2023 में लगभग 40.86 हैक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई थी, जिसे यथावत रखा गया है।
4. कैनाल फ्रंट डवलपमेंट क्षेत्र : श्रीगंगानगर शहर के पूर्वी भाग में गंगनहर के सहारे सहारे लम्बाई 8.30 किलोमीटर का लगभग 84 हैक्टेयर भूमि पर कैनाल फ्रंट डवलपमेंट क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। इस क्षेत्र में पर्यावरण मैत्रीय गतिविधियां यथा वॉकवेज, साइकिल ट्रैक उद्यान, योगा सेेंटर, पिकनिक स्पॉट, स्पोर्ट्स सेंटर, फूड कोर्ट (अस्थायी निर्माण), जन-सुविधाएं आदि विकसित किया जाना प्रस्तावित है। 30 हैक्टेयर भूमि अन्य सामुदायिक सुविधाओ के लिए प्रस्तावित की गई है। 148 हैक्टेयर भूमि का शैक्षणिक, चिकित्सा एवं अन्य संस्थानाें के लिए प्रावधान किया गया है। नेतवाला के पास चक 1 बी छाेटी के चक 58 मुरब्बा नंबर 41,42,43,44 में 4.37 हैक्टेयर भूमि पर कचरा निस्तारण प्लांट बनाया जाएगा।
मास्टर प्लान 2035 लाने की चार बड़ी वजह
1. पदमपुर राेड पर नगरीयकरण याेग्य क्षेत्र की सीमा तक आबादी का विस्तार हाे चुका है।
2. दक्षिण दिशा की तरफ हनुमानगढ़-पदमपुर बाइपास सड़क तक अधिकांश कृषि भूमि पर विभिन्न आवासीय एवं वाणिज्यिक गतिविधियां विकसित हाे चुकी हैं।
3. भू उपयाेग याेजना 2023 में सार्वजनिक व अर्ध सार्वजनिक भू उपयाेग में कई स्थलाें पर आवासीय क्षेत्र विकसित हाे चुके हैं।
4. मास्टर प्लान 2023 में आवश्यकतानुसार भूमि उपलब्ध नहीं हाेने की वजह से यूआईटी नवीन याेजनाएं विकसित नहीं कर पा रही थी।
राेचक यह : मास्टर प्लान का नक्शा लिए काॅलाेनाइजर लाेगाें काे जानकारी देते नजर आए कि मास्टर प्लान 2035 का प्रकाशन हाेते ही विभिन्न काॅलाेनियाें में रह रहे लाेगाें काे पट्टे बनने की उम्मीद जगी है। मंगलवार काे शाम अनेक काॅलाेनाइजर मास्टर प्लान की फाेटाे प्रति साथ लेकर गाैतम बुद्ध नगर सहित अन्य जगहाें पर नक्शे, सड़कें आदि की जानकारी देते नजर आए।
वहीं, अनेक लाेगाें ने न्यास के अधिकारियाें से माेबाइल फाेन के जरिए संपर्क साधकर पता लगाने का प्रयास किया कि उन्हें नए मास्टर प्लान के अनुसार पट्टे मिलेंगे या नहीं। इस पर न्यास अधिकारियाें का जवाब था कि जाेनल प्लान के बाद ही असल स्थिति का पता चल सकेगा।

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