हमारे दिल में अब रहते नहीं हैं भाव के रिश्ते

बचे हैं अब यहाँ यारो फ़क़त अलगाव के रिश्ते

नहीं इंसां बचा कोई हुए हिन्दू-मुसलमां सब

हुए हैं लुप्त हर मन से यहाँ सद्भाव के रिश्ते

©️✍️ लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'