बंबई में नवभारत
ऋषिकेश राजोरिया
बंबई में हिंदी का महत्व बनाए रखने वाले कई लोग थे। साप्ताहिक करंट निकालने वाले महावीर अधिकारी, ब्लिट्ज निकालने वाले नंदकिशोर नौटियाल, दोपहर दो बजे शुरू करने वाले राम मनोहर त्रिपाठी सहित एक दर्जन से ज्यादा लेखक, पत्रकार, कथाकार, साहित्यकार तो थे ही, कुछ संपन्न लोग भी हिंदी के हित में कार्यक्रमों को आर्थिक प्रोत्साहन देते थे, जिनमें सराफ बंधु का उल्लेख करना समीचीन होगा। सराफ बंधु तीन भाई थे और तीनों साहित्यकारों की बड़ी सेवा करते थे। सबरंग के जरिए धीरेन्द्र अस्थाना भी हिंदी की पताका थामे हुए थे, इसलिए स्वाभाविक तौर पर उनकी नजदीकियां सराफ बंधु से बढ़ गई थी। नवभारत का बंबई संस्करण भी छपने लगा था, जिसका कार्यालय पहले नवी मुंबई में था। अजय उपाध्याय उसके स्थानीय संपादक बनकर आए थे। वे वाजपेयी सरकार में अपने संपर्कों का फायदा उठाकर हिंदुस्तान टाइम्स के शीर्ष प्रबंधन तक सिफारिश पहुंचाने में सफल रहे और हिंदुस्तान के संपादक बन गए थे। इससे पहले वे बगैर किसी से कुछ कहे-सुने, बगैर बताए इस्तीफा प्रबंध संपादक की टेबल पर रखकर रवाना हो गए थे।
इसके बाद भूपेन्द्र चतुर्वेदी स्थानीय संपादक बनकर बंबई आया।

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