अक़्ल के इन दुश्मनों की अक़्ल पर ताला मिला

हमको अक्सर बेबसों की अक़्ल पर ताला मिला


वो जो मन की बात हरदम कर रहा है देश में

उसके अपने साथियों की अक़्ल पर ताला मिला


बन्द दरवाज़ों को रहबर खटखटाये किस तरह

क़ौम के इन क़ाफ़िलों की अक़्ल पर ताला मिला


जब भी कोई मश्विरा माँगा है हमने ज़ीस्त का

बारहा इन दोस्तों की अक़्ल पर ताला मिला


ज़िन्दगी भर दिल के हाथों ही रहे मजबूर ये

इस जहां में दिलजलों की अक़्ल पर ताला मिला


जब हुईं बातें अदब की जब हुई कुछ गुफ़्तगू

मंच के इन शाइरों की अक़्ल पर ताला मिला


वो जो चिपकी ही रहीं 'साहिल' से यारो उम्र भर

हमको ऐसी कश्तियों की अक़्ल पर ताला मिला

©️✍️ लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'