कोटा से हँसपाल यादव।
राज्य आबकारी नीति के विरोध में कोटा वाइन कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने आंदोलन सोमवार से शुरू कर दिया। कोटा वाइन कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद पारेता व वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय सिंह राठौड़ अन्य पदाधिकारियों की अगुवाई में शराब विक्रेताओं ने धरना दिया, बोतलें फोड़ी और एक मत होकर किसी भी प्रकार का बिल नहीं कटवा कर विरोध किया। आंदोलन आबकारी नीति में बदलाव होने तक जारी रहेगा। इस क्रम में मंगलवार को सद्बुद्धि यज्ञ किया जाएगा। आंदोलन के दौरान विभिन्न मांगों को लेकर आबकारी आयुक्त के नाम ज्ञापन भी दिया गया। अध्यक्ष विनोद पारेता एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि एसोसिएशन के आह्वान पर शहर के सभी शराब विक्रेता एकत्रित हुए और अंग्रेजी व देसी शराब के गोदाम के बाहर आबकारी नीति में गारंटी नियम के बदलाव को लेकर नारे लगाए। इसके बाद व्यापारियों ने यहां शराब की बोतलें फोड़ी व धरना दिया। देशी व अंग्रेजी शराब के सभी विक्रेताओं ने एक मत होकर किसी भी प्रकार का कोई बिल नहीं कटवाया और गोदाम से माल भी नहीं उठाया। शराब व्यवसायियों का कहना है कि गारंटी नियम के चलते विक्रेताओं का हाल लगातार खराब होता जा रहा है। इस संबंध में पूर्व में भी कोटा से लेकर जयपुर तक सभी स्तर के अधिकारियों से निवेदन किया जा चुका है। लेकिन कोई भी इस संबंध में सुनने को तैयार नहीं है। एसोसिएशन कई महीनों से राज्य सरकार में आबकारी विभाग के प्रमुख शासन सचिव जोगाराम, प्रदेश के मुख्य सचिव निरंजन आर्य तक को ज्ञापन देकर अपनी बात कह चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से लगातार आश्वासन ही मिल रहा है। ऐसे में कांट्रेक्टर एसोसिएशन में सभी शराब व्यापारियों ने संयुक्त रूप से निर्णय लेकर सोमवार से विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के तहत शराब व्यापारी अंग्रेजी या देसी किसी भी तरह की शराब की बिलिंग नहीं करेंगे। गारंटी नीति का यह विरोध बदलाव होने तक जारी रहेगा। पारेता ने बताया कि मंगलवार को विरोध स्वरूप सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ किया जाएगा।
ये रखी मांगें।ज्ञापन में शराब ठेकों में गारंटी की बाध्यता खत्म की जाए। नई शराब नीति में नीलामी में गारंटी की बोली होने के कारण कम्पोजिट फीस का कोई औचित्य नहीं बनता इसलिए इसे हटाया जाए। यदि ठेकेदार गारंटी पूरी नहीं कर पाता है तो उसमें सिर्फ आबकारी शुल्क लिया जाए, उस पर बीएलएफ हटाया जाए। अंग्रेजी शराब में जो 20 प्रतिशत मार्जिन दिया गया था वो पूरा दिया जाए। एमएसपी की बाध्यता समाप्त की जाए और एमआरपी ही लागू रखी जाए। इसमें मुख्य रूप से संरक्षक संतोष अग्रवाल विनोद झामनानी सोहन सुवालका राम कल्याण नागर जाकिर भाई आदित्य सिंह हाडा बलिंदर सिंह चावला अशोक अदलाक्का योगेश चतुर्वेदी इसरार बेक राजू पालीवाल गुरप्रीत काजू सरदार सतेंद्र सिंह निलेश मंडा श्याम शर्मा सावर बना शंकर बना विक्रम सिंह नरूका रामराज नगर रमेश मेवाड़ा धर्मेंद्र मीणा महावीर पारेता हनुमान पारेता देवेश तिवारी एवं कोटा एव ग्रामीण शहर के सभी ठेकेदार उपस्थित रहे।


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