अजमेर में मिली करोड़ों की नशीली दवाइयों के मामले में एसओजी मुख्य सरगना तक पहुंचने में कामयाब हो गई है। वहीं अजमेर की दवाओं के सौदागर श्याम सुंदर मूंदड़ा और उसके मैनेजर को जयपुर जेल से प्रोडक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें दो दिन के रिमांड पर सौंप दिया गया। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ चल रही है।



एसओजी इंस्पेक्टर भूराराम खिलेरी ने बताया कि जयपुर और अजमेर में करोड़ों रुपए की नशीली दवाओं की खेप पकड़ी गई थी। यह दवाइयां श्यामसुंदर मूंदड़ा ने मंगवाई थी। इसको लेकर मूंदड़ा, उसके मैनेजर शेख साजिद सहित अन्य की गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले में जयपुर जेल से श्याम मूंदड़ा और शेख साजिद को प्रोडक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार करके अजमेर लाया गया। दोनों आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया जहां से पूछताछ के लिए दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है।


फर्म ही निकली फर्जी,


 खिलेरी ने बताया कि दीमापुर नागालैंड की बायो मैक्सचर फार्मास्यूटिकल फर्म भी फर्जी निकली। नागालैंड के एडिशनल ड्रग कंट्रोलर डबल्यू एच पट्टन ने पत्र लिखकर बताया कि इस नाम की कोई कंपनी वहां रजिस्टर्ड नहीं है और फर्जी कंपनी बताकर ही इन दवाओं की डिलीवरी हुई है। वहीं जब हिमालय मेडिटेक से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने नोटरी रजिस्टर्ड होने के कारण इस कंपनी पर विश्वास करना बताया। उक्त मामले में हिमालय मेडिटेक की लापरवाही भी उजागर हुई है। 


ड्रग विभाग का ढुलमुल रवैया जिम्मेदार,


जयपुर की रमैया फर्म भी डमी की तरह काम में ली जा रही थी। इसके संचालक ने ड्रग विभाग को 28 फरवरी को पत्र लिखकर इसके लाइसेंस को निरस्त करने की मांग की थी लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते इस पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते तस्करों ने इस फर्म को काम में लिया और करोड़ों की अवैध नशीली दवाओं को मंगवाया गया। बाद में यह दवाइयां पकड़े जाने के बाद इस लाइसेंस को निरस्त किया गया। 


कमल मौर्य है प्यादा,


जानकारी के मुताबिक इस मामले में जिस कमल मौर्य को अब तक मुख्य सरगना बताया जा रहा है। वह केवल मात्र एक प्यादा है। जो अपने आकाओं के इशारे पर काम करता था। मूंदड़ा और मुख्य सरगना के बीच की कड़ी कमल मौर्य था। वहीं बताया जा रहा है कि एसओजी के हाथ सरगना की पूरी जानकारी हाथ लग गई है। उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाए जा रहे  हैं। इसके बाद सरगना को भी दबोच लिया जाएगा। उक्त सरगना के खिलाफ पूर्व में भी इन्हीं मामलों में चालान पेश हो चुके हैं। एसओजी इन मामलों में उसकी लिप्तता के संबंध में मूंदड़ा से सख्ती से पूछताछ कर रही है। 


मेडिकल स्टोर संचालकों के भी आए नाम,


जानकारी यह भी मिल रही है कि अजमेर के कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों के नाम भी एसओजी की जांच में सामने आए हैं। इन मेडिकल स्टोर से भी नशीली दवाएं बेची गई थी। अब एसओजी गहनता से जांच कर रही है।

अजमेर से नवीन वैष्णव की रिपोर्ट,