कोटा से हँसपाल यादव की रिपोर्ट

भारतीय किसान संघ की ओर से कोटा संभाग को आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने और गांवों में तुरंत आपदा राहत भेजने की मांग की गई है।भारतीय किसान संघ के संभागीय प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि गत दिनों से अनवरत चल रही अतिवृष्टि से किसानों की कमर टूट गई है। खरीफ की तकरीबन सभी फसलों में 100 फीसदी खराबा हो चुका है। संभाग भर में सोयाबीन, उड़द, मक्का की 90 फीसदी बुआई हो चुकी थी, सोयाबीन में तो फूल भी आने लगे थे, लेकिन लगातार हुई अत्यधिक बारिश ने कोटा, बारां, झालावाड़ समेत संभाग भर में सोयाबीन और उड़द को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। प्रांत महामंत्री जगदीश कलमंडा ने बताया कि इटावा, दीगोद, खातोली, कनवास, सांगोद, खानपुर, रायपुर, मनोहर थाना, किशनगंज, शाहाबाद हर क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। कालिसिंध, परवन, पार्वती में चढ़ रहे पानी ने किसानों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष गिरिराज चौधरी ने बताया कि गांवों में जलमग्न होकर तालाब बन चुके खेतों को पहचानना मुश्किल हो गया है। चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है। गांवों में लोगों के मकान ढह गए, राशन सामग्री भीगकर सड़ने लगी है। इससे लोगों के आवास और भोजन की भी समस्या पैदा हो गई है। लोगों को मंदिर आदि सार्वजानिक स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने बताया कि अभी भी कईं गांवों का संपर्क कटा हुआ है, जबकि बिजली आपूर्ति भी कईं दिनों से बाधित है। ऐसे में गांवों की स्थिति बदतर हो गई है। आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित करे सरकार प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि सरकार को कोटा संभाग को आपदाग्रस्त घोषित करते हुए तत्कालिक सहायता भेजनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर भोजन और राशन की व्यवस्था करनी चाहिए। अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता जारी करे। वहीं सर्वे के काम को समयबद्ध और शीघ्र पूरा कर किसानों को मुआवजा राशि तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की क्लेम राशि शीघ्र दिलाई जाए। उन्होंने बताया कि 2019 में आई बाढ़ की फसल बीमा राशि केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को भेजे जाने के बावजूद दो साल बाद भी किसानों के खातों में नहीं डाली गई है। ऐसे 2019 की राशि को तुरंत जारी किया जाए।