मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां काफी जटिल है। ऐसे में यहां बिजली- पानी- सड़क सहित कई जन सुविधाओं की डिलीवरी और लागत अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा आती है।
ऐसे हालात में राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। गहलोत ने गुरुवार को वीसी के जरिए हुई मुख्यमंत्री आर्थिक सुधार सलाहकार परिषद की बैठक मे केंद्र पर जमकर निशाने साधे। उन्होंने कहा कि कोविड के चलते प्रदेश के राजस्व में भारी गिरावट आई है।
दूसरी ओर 15वें वित्त आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2020-- 21 के लिए राजस्थान को 50 हजार करोड रुपए देने का अनुमान लगाया था लेकिन वास्तविक हस्तांतरण लगभग 32,000 करोड रुपए ही आया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण विभिन्न परियोजनाओं में केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 से अब 50: 50 पर आ गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि कोरोना काल मे शिक्षा के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ने से गरीब और अमीर वर्ग के बीच खाई और भी बढ़ेगी। समृद्ध परिवार के बच्चों ने विभिन्न ऐप के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी है, जिससे उनको भविष्य में अच्छे जॉब मिलेंगे। वहीं सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को पढ़ाई जारी नहीं रहने के चलते रोजगार मिलने में कठिनाई होगी। बैठक के दौरान गहलोत ने कहा कि सरकार का वर्तमान बजट स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित रहा है और प्रदेश में इसी के चलते चिकित्सा का आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ है। अब प्रदेश का अगला बजट कृषि क्षेत्र को समर्पित होगा। इसके लिए वित्त विभाग ने आदेश भी जारी कर दिया है।
ब्यूरो रिपोर्ट।


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