प्रदेश में निजी स्कूलों की ओर से वसूली जा रही फीस को लेकर अभी मामला पूरा सुलझा नहीं कि इसी बीच राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से फीस मे तय किए गए कई शुल्क को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रवेश का दौर शुरू होने वाला है। कोरोना काल में संस्थान बंद रहने के बावजूद छात्रों से कई तरह का शुल्क वसूला जा रहा है इसमें छात्र सहायता, टंकण शुल्क, छात्र संघ सदस्यता शुल्क, क्रीड़ा शुल्क, वाचनालय शुल्क, पुस्तकालय शुल्क, प्रकाशन शुल्क, पार्किंग शुल्क, शैक्षणिक यात्रा शुल्क और विकास शुल्क शामिल है।


इस बारे में छात्रों का कहना है कि कोरोना काल में विश्वविद्यालय में सभी तरह की गतिविधियां बंद थी और फिलहाल अभी तक यह सारी व्यवस्थाएं समुचित रूप से शुरू नहीं की गई है। ऐसे में विश्वविद्यालय का इस तरह के शुल्क वसूलना छात्रों के साथ नाइंसाफी है। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी का कहना है कि विश्वविद्यालय को ऐसे शुल्क समाप्त करने चाहिए जिससे कि फीस में कमी हो सके और छात्रों पर आर्थिक भार कम हो। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में लगभग सभी की आर्थिक परिस्थितियां प्रभावित हुई है। ऐसे में विश्वविद्यालय को चाहिए कि वे ऐसे शुल्क में कटौती करें।

 आपको बता दें कि विश्व विद्यालय को परीक्षा शुल्क से ही लगभग 150 करोड रुपए से ज्यादा की राशि प्राप्त हुई है। वही इस तरह के शुल्क लगाकर लगभग ₹1000 प्रति छात्र फीस में इजाफा होता है। विश्वविद्यालय की यूजी और पीजी कक्षाओं में लगभग 10,000 सीटें हैं। ऐसे में परीक्षा शुल्क से अतिरिक्त ली जाने वाली राशि ही लगभग ₹ एक करोड़ हो जाती है।

 उथर इस बारे में आरयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर राजीव जैन का कहना है कि विश्वविद्यालय ने इस बार किसी भी तरह की फीस में बढ़ोतरी नहीं की है। रही बात फीस के साथ ऐसे शुल्क की तो यूनिवर्सिटी के कोरोना काल के दौरान खर्चे भी बढे़ हैं। परीक्षा कार्य में डिस्टेंसिंग के लिए सेंटर बढ़ाना, परीक्षक बढ़ाना, सैनिटाइजेशन करना और वैक्सीनेशन कैंप लगाने जैसे कई खर्चे बढे़ हैं।


ब्यूरो रिपोर्ट।