ब्यूरो रिपोर्ट, प्रदेश में मानसून आने से पहले किए गए आपदा प्रबंधन के इंतजाम वक्त पर कामयाब नहीं हो पाए हालांकि सरकार ने प्रबंधन के दावे तो खूब किए लेकिन उन दावों पर समय रहते अमल नहीं हो पाया। ना तो जिला मुख्यालयों पर विशेष टीमें पूरी तरह बन पाई और ना ही अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सकी। इसी का नतीजा ये है कि प्रदेश में कई जगह बाढ़ के हालात हैं और जनता भगवान भरोसे है।  

कई जगह तो स्थिति यह भी है कि लोग बचाने की गुहार कर रहे हैं वहीं प्रशासन संसाधन नहीं होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर रहा है। लगभग एक सप्ताह की जोरदार बारिश ने ही सरकारी इंतजामों की पोल खोल कर रख दी है। आपको बता दें कि इस बार कई जिलों में बरसात ने कहर ढाया है लेकिन इस दिशा में आपदा प्रबंधन के लिए समय रहते कोई इंतजाम नहीं हुए, जिससे आम जनता को खासा नुकसान झेलना पड़ा। यदि वास्तविक धरातल पर हम सच्चाई देखें तो प्रदेश के 23 जिलों में राज्य सरकार ने सिविल डिफेंस के जवानों को मानदेय पर नौकरी दे रखी है। 


इनके पास संसाधनों के नाम पर सिर्फ रस्सी, परात और फावड़े ही उपलब्ध है। हालात ये है कि भारी बरसात के चलते सामने आई विकट परिस्थितियों से आम जनता को खुद ही जूझना पड़ रहा है। उधर हाडोती सहित धौलपुर, भरतपुर और करौली जिलों में हुई भारी बरसात को लेकर राज्य सरकार ने सेना से संपर्क किया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत कार्यों के संबंध में निर्देश दिए हैं। प्रदेश के कोटा, बांरा, बूंदी और झालावाड़  इलाकों में बाढ़ के हालात हैं। कोटा कलेक्टर ने ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार को सेना बुलाने के लिए पत्र लिखा था