बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा में केंद्रीय श्रम व पर्यावरण मंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव ने अजमेर में बयान दिया कि राजस्थान टीम बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां टीम के नेतृत्व में ही कमल खिलाएगी, ने राजस्थान में सियासी गर्मी बढा दी है।

अब सवाल उठ रहे है कि क्या चुनाव से ढाई साल पहले ही भूपेंद्र यादव ने राजस्थान में नेतृत्व काे लेकर संकेत दे दिए है या सिर्फ उनकी निजी राय है। नेतृत्व काे लेकर उनके बयान पर हलचल इसलिए भी बढ़ गई है क्याेंकि बताैर प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां का कार्यकाल दिसंबर 2022 में खत्म हाे रहा है। ऐसे में उन्हें कंटीन्यू करके पार्टी चुनाव लड़ेगी या कोई नया नेतृत्वकर्ता आएगा।

चर्चा इस बात की भी; प्रदेश प्रभारी से उलट है बयान
यादव ने ये बात बात जनता और मीडिया के बीच सभा में की। उधर प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह लगातार कह चुके हैं कि सिर्फ पीएम माेदी के नेतृत्व में या चेहरे पर राजस्थान में चुनाव लड़ा जाएगा। चूंकि चुनाव दूर हैं। ऐसे में पार्टी काे लगेगा कि राजस्थान में चेहरा घाेषित करने की जरूरत है ताे फैसला लेगी। ऐसे में अब पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री का बयान कुछ उलट सा है।

बयान के मायने भी हैं अहम
यादव के इस बयान के मायने प्रदेशाध्यक्ष काे मजबूती देने से लेकर विधानसभा चुनाव में टिकटाें की दाैड़ तक से जाेड़कर देखा जा रहा है और चर्चा हाे रही है। पूनियां काे अपनी ही पार्टी में विधायक और पूर्व विधायकाें की नाराजगी और विराेध का सामना करना पड़ा है।

नजदीकी चर्चा में रही : जन आशीर्वाद यात्रा के लिए केंद्रीय आलाकमान ने राजस्थान में भूपेंद्र यादव काे जिम्मेवारी दी। उन्हाेंने अलवर, जयपुर और अजमेर में अलग-अलग जगहाें पर सभाएं, कार्यकर्ताओं संग बैठक की। उनकी यात्रा में पूरे समय सतीश पूनियां साथ रहे और यात्रा काे बताैर प्रदेशाध्यक्ष लीड भी किया। यादव और पूनियां के बीच नजदीकी भी देखी गई। इसकी वजह ये भी मानी जाती है कि दाेनाे ही राजनीति करने से ज्यादा संगठन में काम करने के लिए पहचान रखते है।

सीएम के चेहरे की लगातार उठ रही है मांग प्रदेश में पाेस्टर वार के दाैरान बीजेपी के कई नेताओं ने सीएम का चेहरा घाेषित करने की मांग कर दी थी। प्रदेश संगठन के नेतृत्व व कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए गए थे। हालांकि प्रदेश प्रभारी अरूण सिंह की दखल के बाद नेताओं की बयानबाजी का मामला शांत हुआ था।