करौली से अवनीश पाराशर की रिपोर्ट

सावन माह की समाप्ती के साथ ही करौली जिले में पतंग उत्सव चालू हो जाता हैं.. रक्षाबंधन से कृष्ण जन्माष्टमी तक बाजारों में पतंगों की दुकानों पर भारी भीड जमा होती रहती है.. लोग पतंग बाजी का लुत्फ लेने को अपनी अपनी छतों पर चढकर बो मारा बो काटा के शोर को सुनते रहकर आसमान में उडती पतंगों का मजा लेते हैं..खास कर बच्चों में पतंग बाजी का शौक परवान पर रहता है..छोटे छोटे बच्चे दिन भर पतंग बाजी का लुत्फ लेकर कभी पतंग उडाते है.. तो कभी कटती पतंग को लूटने के लिए हाथों में बडे बडे डंडे में झाड लगाकर गलियों और छतों पर बन्दरों की तरह कुदान लगाते नजर आ रहे है..

दरअसल प्राचीनकाल से ही करौली जिले मे रक्षाबंधन से जन्माष्टमी तक पंतग उडाने की परम्परा है.. पतंगबाजी का आनन्द लेने को बाजारों में पतंगों की दुकानों पर सजावट जारी है..कई शहरों में चायनीज माॅझे की विक्री से कई लोग इस माझे के प्रयोग से घायल हो गए तो कई की जान पर बन आई.. मगर करौली में चायनीज मांझे की विक्री पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है.. जिला कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने भी आदेश जारी कर चाईनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाया है। 


बाजारों में देशी माझा बना पहली पंसद।

युवाओं मे देशी माझा पहली पंसद बना हुआ है.इसके अलावा बरेली का मांझा लोगों की पसन्द बन रहा है..  लोगों में पतंग डोर की खरीद करने की मानों होड ही मची हुई है.. कहीं बडे लोग अपने लिए पतंग खरीद रहे हैं तो कोई बच्चों की पतंग डोर की फरमाईश पूरी करते नजर आ रहे हैं.. शहर की छतो पर युवाओं की टोलियां की बो मारा बो काटा का शोर गुजायमान होते हुऐ सुनाई दे रहे है..कृष्ण जनमाष्टमी तक करौली में पतंग बाजी की धूम रहेगी


फैंसी और देशी पतंगों बनी युवाओं की पंसद

करौली शहर में सबसे ज्यादा युवाओं को फैंसी और देसी पतंगों की पसंद बनी हुई है यह पतंग दो रूपये से लेकर चालीस रुपये तक बेची जा रही हैं.. वही माझा में बरेली का माझा युवाओं की पहली पसंद बना हुआ है.. इसके अलावा कालाबिच्छू,जागीर बारशी,मुनक्का,शबीर बेग,कारीगरों के माझे की भी युवाओं मे खुब डिमांड है..जो 180 रुपये से लेकर 400 रुपये तक बेचा जा रहा है..