देश के कुछ राज्यों में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे तीसरी लहर माना है लेकिन राजस्थान में इसका असर कब होगा, इसको लेकर अभी तक सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान नए मरीजों की संख्या महाराष्ट्र और केरल सहित कुछ अन्य राज्यों में बढ़ रही है।
जिसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि वहां टेस्टिंग ज्यादा हो रही है, लेकिन राजस्थान प्रदेश की बात करें तो यहां रोजाना डेढ़ लाख जांच करने की क्षमता होने के बावजूद पिछले 1 सप्ताह के दौरान सिर्फ 2,70,000 टेस्टिंग हुई है। इसी का नतीजा ये भी है कि प्रदेश में सामने आ रहे पॉजिटिव केस की संख्या में लगातार कमी देखने को मिल रही है। यदि हम पिछले सप्ताह देश में हुई कोरोना टेस्टिंग की बात करें तो राजस्थान प्रदेश सबसे निचले पायदान में शामिल है। महाराष्ट्र में 7 दिन की अवधि के दौरान 13,60,000 और केरल में 11,60,000 टेस्टिंग की गई लेकिन हमारे यहां महज 2,70,000 जांचे हुई। टेस्टिंग कम करने को लेकर चिकित्सा विभाग का तर्क है कि यहां संक्रमितों की संख्या कम है, इसलिए टेस्टिंग भी कम है।
विशेषज्ञों को चिकित्सा विभाग का यह तर्क ठीक नहीं लग रहा। मध्यप्रदेश और गुजरात में भी 7 दिन की अवधि के दौरान राजस्थान के मुकाबले कम संक्रमित मिले हैं, लेकिन वहां टेस्टिंग की संख्या अभी भी राजस्थान से दोगुनी है। देखा जाए तो प्रदेश में प्रति दस लाख की आबादी पर टेस्टिंग की दर दर महज 400 ही है।
ब्यूरो रिपोर्ट।



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