कोटा से हंसपाल यादव की रिपोर्ट।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सांगोद और इटावा सहित कोटा-बूंदी के ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ जलभराव हम सब के लिए एक सबक होना चाहिए। प्रशासन इस स्थिति को वीडियोग्राफी करवाकर इसको एक केस स्टडी में ले तथा भविष्य में ऐसी किसी आपदा को आने से पूर्व ही रोकने की तैयारी करे। वे रविवार सुबह कोटा व बूंदी के जिला कलक्टर तथा अन्य अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा कर रहे थे। बिरला ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव का मुख्य कारण ड्रेनेज की समुचित व्यवस्था नहीं होना है।
अधिकारी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भरने के कारणों की जांच कर उसकी निकासी की समय रहते व्यवस्था करें। आपदा आने के बाद प्रयास प्रारंभ करना चुनौती से पार पाने का सही तरीका नहीं है। इसमें नुकसान सिर्फ आमजन का होता है। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि वे खुद प्रभावित क्षेत्रांे में गए हैं। काफी नुकसान हुआ है, फसलों में पूर्ण खराबा है। मकान धराशयी हो गए हैं, जो क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें भी गिराकर नया ही बनाना पड़ेगा। ऐसे में 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। अधिकारी नुकसान का सर्वे शीध्र करवाएं, जिससे लोगो को अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान टूटे हैं उनका सर्वे करवाए साथ ही, सर्वे में चिन्हित लोग यदि आवास प्लस एप्प में सूचीबद्ध है एसे लोगों को प्राथमिकता से आवास उपलब्ध करवाएँ।
बिजली बंद पड़ी है, सीएडी को नहीं पता पानी कहां से आता है
बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सीएडी इतना बड़ा विभाग है लेकिन उसके अधिकारियों को यह भी नहीं पता कि गांवों में पानी कहां से आता है और उसकी निकासी का क्या रास्त है। विद्युत विभाग अभी तक कई गांवों में विद्युत तंत्र करे दुरूस्त नहीं कर पाया है, जबकि कई राज्यों में तूफान आने के बाद भी 7 दिनो में व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाती हैं। बिरला ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन लोगों को आश्रय स्थल पहुंचाया गया है, वहां उन्हें सभी सुविधाएं मिलें।




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