कोटा से हंसपाल यादव
कोटा पुलिस को आज बडी सफलता हाथ लगी हैं। 13 सालों से फरार चल रहे, तीन हत्याओं में मुलजिम सुमेर सिंह हार्डकोर बदमाश को पकडने में कामयाबी मिली हैं। बदमाश पर 15 हजार का इनाम घोषित था। जिसे कोटा उद्योगनगर थाना पुलिस ने जयपुर के गोनेर के पास स्थित दातली गांव से गिरफतार किया हैं। सुमरे सिंह गांव में पहचान छुपाकर महेंद्र सिंह नाम से निवास कर रहा था।
यह बदमाश कोटा और उदयपुर रेंज के टाॅप 10 वांटेड में शामिल हैं। जिसकी पिछले 13 सालों से कोटा पुलिस इसकी तलाश कर रही थी। कोटा शहर जिला पुलिस अधीक्षक डाॅ विकास पाठक के मुताबिक राजस्थान पुलिस महानिदेशक के द्वारा प्रदेश में चला रखे विशेष अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए, उद्योगनगर थाना पुलिस ने करीब एक माह के अथक प्रयास करते हुए इस हार्डकोर बदमाश को पकडा हैं।इधर, हिस्ट्रीशीटर व गैंगस्टर सुमेर सिंह की गिरफ्तारी पर उदयपुर रेंज महानिरीक्षक द्वारा 10 हजार रूपए और कोटा शहर पुलिस अधीक्षक द्वारा 5 हजार रूपए के ईमान की घोषणा की थी। 49 साल की उम्र का सुमेर सिंह कोटा शहर के महावीरनगर थर्ड का रहने वाला हैं।
तीन गैंगस्टर की हत्याओं का मुजरिम हैं सुमेर सिंह
साल 2007-08 में हाडौती के कुख्यात गैंगस्टर रहे भानुप्रताप सिंह गिरोह का दो भागों में बंट गया था। एक गुट भानुप्रताप सिंह दूसरे गुट का नेतृत्व लाल बैरागी कर रहा था।वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा में भानुप्रताप ने अपने साथियों के साथ मिलकर 12 दिसंबर 2008 को गैंगस्टर लाला बैरागी का थाना उद्योगनगर क्षेत्र के राजनगर तिराहे पर सरेआम गोलियों से भूनकर, तलवार से काटकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में 40 से ज्यादा फायर हुए थे। इसके बाद केस के गवाह ब्रजराज सिंह उर्फ बबलू ओर उसके साथ जितेंद्र सिंह उर्फ पिंटू दोनों का 12 मई 2009 को चितौडगढ जिले के मेनाल के पास भानुप्रताप व उसके साथियों ने मिलकर मर्डर कर दिया था।
हत्याकांड में करीब 100 से ज्यादा फायर हुए थे। दोनों बडी घटनाओं से हाडौती सहित पूरे प्रदेश के कई हिस्सों में इस गैंग का वर्चस्व बढ गया था। इन हत्याओं में गैंगस्टर भानुप्रताप सिंह का साथ सुमेर सिंह राजावत भी शामिल था। पुलिस से घबराकर सुमेर सिंह प्रदेश से बाहर फरारी काटने लग गया था। इसने अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से संपर्क खत्म कर लिए थे।19 अप्रेल 2011 को गैंगस्टर शिवराज सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर जिला भीलवाडा के बिजोलिया में पुलिस हिरासत गैंगस्टर भानुप्रताप सिंह की हत्या कर दी थी। उसके बाद से सुमेर सिंह ही भानुप्रताप सिंह की गैंग संचालित कर रहा था। लगातार पुलिस सुमेर सिंह का पीछा कर रही थी। ऐसे में सुमेरसिंह पुलिस की भनक लगते हुए ठिकाने बदल लिया करता था। लेकिन आखिरकार वह पकडा गया।



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