प्रदेश में पिछले कई महीनों से चल रही सियासी उलझन अब जल्द ही दूर हो सकती है। कांग्रेस ने पंजाब में आपसी विरोध दूर करने के बाद अब राजस्थान प्रदेश की ओर रुख कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार यहां भी पार्टी सियासी घमासान को दूर करने में जुट गई है, जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इस बारे में पार्टी ने सचिन पायलट से मशविरा लगभग पूरा कर लिया है,
अंतिम निर्णय गहलोत से चर्चा करने के बाद होगा। मंत्रिमंडल में फेरबदल और भौगोलिक जातिगत समीकरणों के अनुसार नये मंत्री बनाने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अंतिम दौर की चर्चा करने के लिए शनिवार शाम कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल जयपुर आ रहे हैं, वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस बारे में चर्चा करेंगे। इससे पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली जाएंगे, लेकिन इसमें अब फेरबदल हो गया है। गहलोत से चर्चा करने के बाद वेणुगोपाल रविवार को दिल्ली लौट जाएंगे। इसके बाद आलाकमान से निर्णय कर मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिया जाएगा।
आपको बता दें कि पंजाब का फैसला करने के बाद आलाकमान सचिन पायलट से किए गए वादों को लेकर सक्रिय हो गया है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन और राष्ट्रीय महासचिव वेणुगोपाल लगातार इस पर काम कर रहे हैं। पिछले दिनों जयपुर में माकन ने भी गहलोत से 2 दिन मुलाकात की थी। पायलट से दिल्ली में चर्चा हो चुकी है। पार्टी आलाकमान की सक्रियता से लग रहा है कि राजस्थान में इसी महीने के अंत तक समाधान निकल जाएगा। पार्टी के अंदर खाने मे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर खासी चर्चा है।
हालांकि अभी तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या राजभवन कार्यालय से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार में पूरे 30 मंत्री बनाने के बजाय 28 तक संख्या रखी जा सकती है। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर 15 संसदीय सचिव भी बनाए जा सकते हैं। आपको बता दें कि प्रदेश में कई ऐसे वरिष्ठ विधायक है जिनको अभी तक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी है। इन्हें इस बार मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर भी आलाकमान का विशेष फोकस है।
ब्यूरो रिपोर्ट।



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