प्रदेश में 32 मीटर से ज्यादा ऊंचाई की बहुमंजिला इमारतों के निर्माण पर लगाई गई रोक बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट ने इस निर्णय को बरकरार रखा है। इसके साथ ही सरकार से 1 सप्ताह की अवधि में ये बताने को कहा है कि प्रदेश में वर्तमान में स्थित बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के लिए कौन से उपकरण उपलब्ध हैं।
हाई कोर्ट के जस्टिस संगीत राज लोढ़ा और जस्टिस महेंद्र गोयल ने ये निर्देश बहुमंजिला इमारतों में आग की स्थिति में निगम के पास उपकरण और संसाधनों की कमी से जुड़े मामले में अधिवक्ता कुणाल रावत की पीआईएल में उदयपुर बिल्डर्स एसोसिएशन के प्रार्थना पत्र पर दिया। कोर्ट ने एसोसिएशन को पक्षकार बनाने की अर्जी खारिज करते हुए इंटवीर्नर बनाने को कहा। एसोसिएशन के वकील संदीप पाठक ने कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट ने 3 जुलाई 2019 को सरकार को इस बाबत पाबंद किया था
कि हाइड्रोलिक लैडर की उपलब्धता नहीं होने तक 32 मीटर से ऊंची इमारतों के निर्माण को मंजूरी नहीं दी जाए। सरकार के पास उपकरण नहीं होने के चलते निर्माण की मंजूरी देना गलत है। अदालत के आदेश से एसोसिएशन के हित प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए उनका पक्ष सुना जाए। अदालत ने पक्षकार बनाने का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए कहा कि पीआईएल में उठाए गए बिंदुओं को देखते हुए एसोसिएशन को पक्षकार नहीं बना सकते। सरकार की ओर से एएजी अनिल मेहता ने आग बुझाने से जुड़े जरूरी उपकरणों की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए 1 सप्ताह का समय मांगा है।
ब्यूरो रिपोर्ट।


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