कोरोना काल के दौरान प्रदेश में राज्य सरकार की ओर से पैरामेडिकल स्टाफ की की गई भर्ती में 413 अभ्यर्थियों के पंजीयन फर्जी निकले है। राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों से फर्जी दस्तावेज के आधार पर डिप्लोमा और डिग्री प्राप्त करने वाले 413 अभ्यर्थियों के पंजीयन स्थाई तौर पर रद्द कर दिए हैं। 




इस मामले में आरपीएससी की ओर से गठित की गई जांच कमेटी ने मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के साथ पूरी जांच की और दस्तावेज खंगाले। इसके बाद विधिक राय ली गई। 23 जुलाई को सुनवाई के बाद गंभीर अनियमितताओं के आधार पर मध्य प्रदेश के 4 डिग्री विश्वविद्यालयों से डिग्री और डिप्लोमा लाने वाले अभ्यर्थियों के पंजीयन रद्द कर दिए गए। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने कोरोना काल के दौरान तत्काल आधार पर 1119 पदों पर लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफर की स्थाई भर्ती निकाली थी।

इसमें दूसरे राज्यों से फर्जी दस्तावेज के आधार पर डिप्लोमा और डिग्री लाने वाले अभ्यर्थी भी शामिल होकर चयनित हो गए। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए थे। उधर लैब टेक्नीशियन रेडियोग्राफर संयुक्त संघ के अनुसार आरपीएमसी ने कोरोना काल के दौरान योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया है।इस मामले में जब दबाव पड़ा तो पंजीकरण रद्द करने पड़े। वही बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों के पंजीकरण को स्थाई रूप से रद्द किया गया है उनकी जगह तत्काल इस भर्ती से वंचित रहे योग्य अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाए।

ब्यूरो रिपोर्ट।