रणबांकुरों की धरती कहे जाने वाले राजस्थान प्रदेश ने देश की सुरक्षा में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। चाहे सीमा सुरक्षा का मामला हो या फिर कारगिल युद्ध। राजपूताना के वीर जवानों ने जो अदम्य शौर्य और साहस दिखाया है उसकी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती।
आजादी के बाद से लेकर अब तक राजस्थान के 1730 से अधिक वीर जवान और सेना अधिकारी अब तक विभिन्न युद्धों और अग्रिम मोर्चे पर दुश्मन से लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं। यह तो सिर्फ आधिकारिक आंकड़ा है, वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है।
राजस्थान प्रदेश में भी सेना को लेकर शेखावटी अंचल का विशेष महत्व है। सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों सहित समूचे शेखावटी क्षेत्र में लगभग 500 से भी ज्यादा सैनिकों ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए हैं। वही इस से लगते नागौर और चिड़ावा क्षेत्र से सर्वाधिक 247 सैनिक वीरों को शहादत मिली है। आपको बता दें कि 1999 के दौरान हुए कारगिल युद्ध में रेगिस्तान के रणबांकुरों ने बर्फीली पहाड़ियों पर हुए युद्ध में अपनी वीरता और शौर्य का जबरदस्त प्रदर्शन किया था। इस युद्ध में प्रदेश के 67 सैनिकों ने दुश्मनों से लड़ते हुए अपनी जान गवाई थी। अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कारगिल युद्ध में देश भर के 500 से अधिक सैन्य कर्मी शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध की याद में इन सभी वीर सपूतों को राजकाज न्यूज़ की ओर से शत-शत नमन।
ब्यूरो रिपोर्ट।


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