रानीवाड़ा (जालोर)। लगता हैं रानीवाड़ा कस्बे में राज्य सरकार के नियम कायदे लागू नही होते, तभी तो प्रदेश में रविवार को वीकेंड कर्फ्यू के चलते बाजार बंद होने के बावजूद रानीवाड़ा कस्बे में शराब की दुकानें खुली रखकर ठेकेदार खुलेआम शराब की बिक्री कर रहे हैं। दरअसल रानीवाड़ा कस्बे के महाराणा प्रताप चौक में सरकारी लाइसेंस प्राप्त एक शराब की दुकान स्थित हैं। जहाँ आज हमारी टीम ने मौके पर पहुंचकर इस दुकान का स्टिंग किया। हमारी टीम जब यहां पहुंची तो इस दुकान पर बेरोकटोक शटर खुला रखकर शराब बेची जा रही थी।
ग्राहक बिना किसी बाधा के यहां से खुलेआम शराब की खरीदी कर रहे थे। और ये सारा मंजर हमारे कैमरे में कैद कर लिया गया। शराब की दुकान पर बैठे सेल्समैन से जब पूछा गया कि यह दुकान किसकी हैं तो उसने बताया कि यह दुकान गणेशाराम देवासी की हैं। हमारी टीम ने बोगस ग्राहक बनकर शराब की उस वेरायटी की मांग की जो इस दुकान में उपलब्ध नही थी, तो सेल्समैन ने कहा कि रानीवाड़ा कस्बे में उनकी कुल चार दुकाने हैं आपको जो वेरायटी चाहिए वो दूसरी दुकानों पर मिल जाएगी। तब हमारी टीम इसी ठेकेदार की तीन अन्य दुकानों पर भी पहुंची, जिसमें एक दुकान जाखड़ी रोड़ पर स्थित हैं और ये भी लाइसेंसी दुकान है। जब हमारी टीम जाखड़ी रोड़ पर पहुंची तो इस दुकान का मुख्य दरवाजा बन्द था लेकिन दुकान के पिछले दरवाजे से शराब की बिक्री जारी थी।
हमारी टीम ने यहां पर भी स्टिंग कर पूरे नज़ारे को कैमरे में कैद किया। हमारी टीम ने यहां भी शराब की खरीदी करने के लिए सेल्समैन से पूछा तो उसने एक बियर जिसकी एमआरपी 275 रुपये लिखी हुई थी, लेकिन सेल्समैन ने 300 रुपए की मांग की। एमआरपी से अधिक मांग करने पर पूछा तो सेल्समैन बोला "आपको चाहिए तो लो यहां तो इसी रेट में मिलेगी।" यानी एमआरपी से अधिक की वसूली यहां खुलेआम की जा रही हैं।
जाखड़ी रोड के बाद हमारी टीम जालोर रोड़ स्थित इसी ठेकेदार की एक अवैध दुकान पर पहुंची। यहां पर भी खुलेआम शराब की बिक्री चल रही थी। हालांकि दुकान का मुख्य दरवाजा बन्द था पर दुकान के साइड में लगी खिड़की से यहां भी बिक्री हो रही थी। यहां पर भी निर्धारित मूल्य से अधिक दामों पर शराब का बेचान किया जा रहा हैं। पर जिम्मेदार मूकदर्शक बनी बैठे हैं।
रानीवाड़ा कस्बे में शराब विक्रेताओं से पुलिस की सांठगाठ का अंदाजा लगाने के लिए ये एक तस्वीर ही काफी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब हम जिस जगह की बात करने जा रहे हैं। वो अवैध शराब की दुकान रानीवाड़ा पुलिस थाने की दीवार से सटी हुई दुकान हैं। इस जगह को ठेकेदार ने शराब के गोदाम के नाम रजिस्टर्ड करवाया हुआ हैं। यानी इस जगह पर ठेकेदार सिर्फ शराब का स्टॉक रख सकता हैं, यहां से एक बोतल भी बिक्री नही की जा सकती। बावजूद यहां ओर खुलेआम बिक्री चल रही हैं।
यहां कार्यरत सेल्समैन ने हमारी टीम को बातों ही बातों में बता दिया कि यहां से प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये की शराब बेची जा रही हैं। यानी पुलिस थाने की दीवार के पीछे ही अवैध कारोबार का अड्डा संचालित हो रहा हैं और पुलिस इस पूरे मामले से बेखबर हो, ऐसा कभी हो ही नही सकता। बिना किसी सांठगांठ के थाने की दीवार से सटकर कोई कैसे अवैध गतिविधि संचालित कर सकता हैं? ये हजम होने वाली बात ही नही हैं। पर रानीवाड़ा में यह सब चल रहा हैं और पुलिस बेखबर बनी हुई हैं।
एसपी बोले "मेरे ध्यान में नही, अभी कार्रवाई करवाता हूँ।"
इस पूरे स्टिंग के बाद जब हमने जालोर एसपी श्यामसिंह से टेलीफोन पर बातचीत की तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि ऐसी जानकारी मेरे पास नही हैं। अपने बताया हैं तो अभी कार्रवाई करवाता हूँ। हालांकि हमारा फोन कट होते ही एसपी ने रानीवाड़ा थाने में फोन कर थानाधिकारी को तुरन्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पर क्या सिर्फ एक दिन की कार्रवाई से ये पूरा सिस्टम सही हो जाएगा? क्या आज कार्रवाई करने के बाद कल से नियमों की पालना सुनिश्चित हो जाएगी?
नही कदापि नही। जब तक प्रतिदिन मोनिटरिंग नही होगी। और प्रत्येक बिट कांस्टेबल की जिम्मेदारी तय नही की जाएगी तब तक ये अवैध शराब बिक्री और एमआरपी से अधिक की वसूली ऐसे ही जारी रहेगी। जिस बिट क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री हो रही हैं उन बिट कांस्टेबलों पर अगर कड़ी कार्रवाई की जाए तो जिले में शराब कीएक बूंद भी अवैध तरीके से नही बेची जा सकती। पर ऐसा नही करने से सिर्फ एक दिन की औपचारिकता कर पुनः वही ढर्रा शुरू होता हैं जो कल तक चलता आ रहा था।
जालोर से गणपत सिंह मांडोली की रिपोर्ट।
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