श्रीगंगानगर से राकेश मितवा की खबर

श्रीगंगानगर में गिरी हॉस्पिटल में इलाज के बाद जिला अस्पताल में कोरोना से हुई मौत के मामले में पीड़ित के परिजनों के धरने के जवाब में इंडियन मेडिकल ऐसोसिऐसन ने भी धरना लगा दिया है। आईएमए के 5 सदस्य हर दिन धरने पर बैठ रहे हैं। गौरतलब है कि श्रीगंगानगर का गिरी हॉस्पिटल इन दिनों काफी चर्चा में है। गिरी अस्पताल में बिना अनुमति के कोविड मरीजों के इलाज की शिकायत के बाद CMHO की जांच में अस्पताल में कई मरीजों का कोरोना के तहत इलाज होता हुआ पाया गया तथा अस्पताल में रेमदेसीविर इंजेक्शन भी मिले थे मरीजों के इस्तेमाल के लिए । 

 इसके बाद जांच में अस्पताल को बिना अनुमति के कोविड मरीजों के इलाज का दोषी मानते हुए 3 दिन अस्पताल को सीज किया गया और साथ ही उस पर ₹10000 का जुर्माना भी लगाया गया था। अस्पताल में भर्ती 2 मरीजों की तबीयत काफी खराब हो गई थी उन्हें बाद में जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था ।इसके बाद कोविड-19 से उनकी मृत्यु हो गई थी । 

 बसंती चौक क्षेत्र के 55 वर्षीय निर्मल सिंह की मौत के मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही से इलाज करने का आरोप लगाते हुए गिरी अस्पताल के बाहर धरना लगा दिया था ।परिजनों की मांग थी कि अस्पताल को पूरी तरह से सीज किया जाए तथा इलाज में लापरवाही बरतने के मामले में चिकित्सको पर एफ आई आर दर्ज भी की जाए ।

अब इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय इकाई भी कूद पड़ी है। उन्होंने भी पीड़ितों के धरने के जवाब में अस्पताल के बाहर खुद भी धरना लगा दिया है।  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ हरीश रहेजा का कहना है कि गिरी अस्पताल में अगर किसी भी प्रकार की अनियमितता है तो उसकी प्रशासन जांच करेगा, मगर इस प्रकार से अस्पताल के बाहर धरना देकर अस्पताल की रेपुटेशन को खराब करने तथा साथ ही दूसरे मरीजों को भड़काने की यह गलत परंपरा निश्चित रूप से रोकी जानी चाहिए ।  इसे एक गलत परिपाटी पड़ेगी । इसी के विरोध में आईएमए ने अपना विरोध जाहिर करते हुए यह धरना लगाया है।

फिलहाल दोनों पक्षों द्वारा धरना जारी है। बीच-बीच में पीड़ितों के साथ समझौता वार्ता के प्रयास भी हो रहे हैं। इधर पीड़ित के परिजनों ने अपने रुख में नरमी लाते हुए इस मामले में दोषी चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज करने तथा संबंधित चिकित्सक का चेंबर चीज करने की बात कही है।  गिरी अस्पताल के संचालक डॉ एसएस गिरी ने इस मामले में अपने आप को पूरी तरह पाक साफ बताते हुए कहा है कि उन्होंने पूरे मन और ईमानदारी के साथ मरीज का इलाज किया था। परिजनों ने मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद भी अस्पताल में आकर धन्यवाद व्यक्त किया था ।मगर मगर बाद में मरीज की जिला अस्पताल में कोरोना से मृत्यु हो गई थी ,इसमें उनका कोई दोष नहीं है