ब्यूरो रिपोर्ट, राजधानी जयपुर में राज्य सरकार ने रविवार देर रात एक अहम निर्णय लेते हुए ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर सहित चार भाजपा पार्षदों को बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने इन चारों को धारा 39,(1) की उप धारा 2, 3, 4 के तहत दोषी माना है।

इसका आशय ये है कि सदस्य अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अवचार का दोषी पाया गया है। निकृष्ट आचरण का दोषी है और सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ रहा है। अब धारा 39 (3 ) के तहत जिला न्यायाधीश रैंक के किसी न्यायिक अधिकारी की ओर से इस मामले की जांच की जाएगी। न्यायिक जांच अधिकारी सदस्य को सुनवाई का पूरा मौका देगा और जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा।

 इस आधार पर राज्य सरकार चाहे तो दोबारा जांच करा सकती है या अंतिम आदेश पारित कर सकती है? राज्य सरकार के स्तर पर पारित हर अंतिम आदेश राजपत्र में प्रकाशित होगा और यह अंतिम होगा। ऐसे किसी भी आदेश को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। उधर महापौर सौम्या गुर्जर का कहना है कि कोर्ट का रास्ता खुला है।

जनता ने भाजपा का बोर्ड चुना था, उसे राज्य सरकार पचा नहीं पा रही। निगम के आयुक्त भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनका सरकार समर्थन कर रही है। अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक भी कार्य दिवस का समय दिए बिना विधि विरुद्ध और एक तरफा कार्यवाही की गई है।.

 यह न्याय संगत नहीं है। इसे न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। सरकार ने महापौर सौम्या गुर्जर, पार्षद पारस जैन, अजय चौहान और शंकर शर्मा को दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया है। आपको बता दें कि यह कार्यवाही निगम के आयुक्त से मारपीट, धक्का-मुक्की करने, अभद्र भाषा में बोलने और राजकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में की गई है।