इस बार चलेगा पायलट का जादू !

प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से। 

खेल चाहे जो भी हो, क्रिकेट या राजनीति, दोनों में टाइमिंग का बड़ा महत्त्व है।  आज ही उत्तर प्रदेश के कांग्रेस में नामलेवा बचे ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद ने भाजपा की सदस्य्ता ग्रहण की और यही मौका था पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के तीर छोड़ने का।  याद रहे कि अपना स्तीफा सौंप चुके वरिष्ठ जाट विधायक हेमाराम चौधरी कल यानि गुरूवार को स्पीकर डॉ. सीपी जोशी से मिलने आ रहें हैं और पिछले दो दिनों से वेद प्रकाश सोलंकी ने अपने तमंचे से आवाज़ ज्यादा, नुकसान कम, वाली फायरिंग का दौर चला रखा है।  


ऐसे में पायलट का सीधे सीधे हाई कमांड को पंजाब का उदाहरण देकर राजस्थान का मसला उठाना गजब के निशाने पर बैठा है। एक तरफ पायलट ने अपने मुखर किन्तु अनुशासित असंतुष्ट होने को रेखांकित कर ना केवल अपने समर्थकों को फिर से लामबंद कर दिया है वहीँ दूसरो ओर हाई कमांड को भी स्पष्ट सन्देश दे दिया है कि अब और देरी खतरनाक साबित हो सकती है।  उल्लेखनीय है कि आज मुखर होने से पहले पायलट ने कल देर रात ट्ववीट कर भाजपा पर हमला बोल कर अपना खांटी कांग्रेसी होना जता दिया था। 


अब यह बात तय है कि अगर राहुल गाँधी निकट भविष्य में अखिल भारतीय कांग्रेस की कमान संभालने वाले हैं और उनके विश्वश्त सिपहसालारों में सचिन भी शामिल हैं तो अब प्रदेश प्रभारी अजय माकन को अगले 24 घंटों में कोई ना कोई ऐसा संकेत असंतुष्टों को देना ही होगा जिससे बार और ना बिगड़े तथा राहुल गाँधी अजय माकन को ही नालायक ना मान लें।  


क्या? कैसे? और कब? का चक्कर अब बहुत पीछे छूट गया है।  अब सीएम गहलोत सिर्फ लॉलीपॉप देकर काम नहीं चला पाएंगे।  सूत्रों की माने तो गहलोत ने ठंडे छींटे देने के लिए संगठन में बदलाव के लिए गोविन्द सिंह डोटासरा को भी फोन करके कह दिया है।  कुल मिलाकर इस क्लासिक राजस्थानी सिचुएशन बानी है और उसे एक ठेठ राजस्थानी कहावत से ही स्पष्ट किया जा सकता है।  ' गोबर पड्यो है तो अब माटी लेर ही उठसी '।