भरतपुर, के पीलूपुरा गांव में आज हिम्मत सिंह पाडली ग्रुप ने एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में करीब 250 लोग इकट्ठे हुए बताए जा रहे थे। लेकिन कोरोना महामारी के चलते ग्रामीणों ने हिम्मत पाडली ग्रुप का विरोध किया जिसके बाद बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा।
हिम्मत सिंह कि पंचायत का किरोड़ी सिंह बैंसला के समर्थकों ने किया विरोध। दोनो पक्षों में हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। इस बारे में हिम्मत सिंह पाडली ने बताया कि 30 अक्टूबर 2020 को सरकार की मंत्रिमंडलीय उप समिति के साथ गुजर प्रतिनिधि मंडल की वार्ता हुई थी। जिसमें रीट भर्ती MBC वर्ग के 372 पद और नर्सिंग भर्ती के 350 पदों का 7 दिन में कमेटी बनाकर निस्तारण करने की बात तय हुई थी।
लेकिन सरकार ने अभी तक इस मामले में कुछ नहीं किया। इसके अलावा वार्ता में हर महीने मंत्रिमंडलीय उपसमिति के साथ बैठक कर समझौता पत्र के बिंदुओं की प्रगति की समीक्षा करना तय हुआ था। लेकिन आज तक कोई भी समीक्षा बैठक नहीं हुई। साथ ही सरकार द्बारा देवनारायण योजना में अभी तक कोई काम नहीं किया गया। इन सभी को लेकर समाज में रोष व्याप्त है।
बैठक में निर्णय लिया गया है की सरकार समझौतों पर कोई ध्यान नहीं देगी तो 10 जुलाई को आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। वहीं दूसरी तरफ बैसला ग्रुप के नरोत्तम सिंह अड्डा से बात की तो उन्होंने बताया की आज की बैठक का विरोध इसलिए किया गया है की पाडली ग्रुप ने पीलूपुरा गांव को ही मीटिंग का अड्डा बना रखा है।
कोरोना काल में गाइडलाइन के मुताबिक एक जगह लोगों के इकठ्ठे होने की अनुमति नहीं है। उसके बाद भी आज की बैठक में करीब 250 लोगों को इकठ्ठा किया गया। और अगर पाडली ग्रुप को कोई आंदोलन करना है तो वह जयपुर या कहीं और जाकर आंदोलन करे। ग्रामीणों को इस बैठक की कोई सूचना नहीं थी कल हिम्मत सिंह पाडली ने अपने ट्वीटर पर ट्वीट कर आज की मीटिंग की सूचना दी और समाज के लोगों को इकठ्ठा होने को कहा। हिम्मत सिंह पाडली अपने निजी स्वार्थ के लिए इस तरह की बैठक करते है। इससे समाज के लोग गुमराह होते हैं।
भरतपुर से दीपेश फौजदार की रिपोर्ट।


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