ब्यूरो रिपोर्ट! मई महीने के दौरान देशभर में टीकाकरण की सुस्त रही रफ्तार के बीच सुप्रीम कोर्ट अब एक्शन के मूड में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर कई सवाल खड़े करते हुए अब तक हुई वैक्सीन खरीद की पाई पाई का ब्योरा मांगा है।
इस मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने वैक्सीन की खरीद के लिए आम बजट में रखे गए 35000 करोड रुपए का हवाला देते हुए इसका पूरा हिसाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाय चंद्रचूड़, जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस रविंद्र भट्ट की बेंच ने सरकार से पूछा है कि इस बजट का इस्तेमाल 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को फ्री टीकाकरण में क्यों नहीं किया जा सकता? कोर्ट ने यह कहा कि केंद्र सरकार की 18 प्लस आयु वर्ग के लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में शुल्क सहित वैक्सीन लगाने की नीति प्रथम तौर पर ही असंगत और अतार्किक है। वही इस वर्ग के लिए राज्यों से कीमत वसूलना भी किसी लिहाज से ठीक नहीं कहा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन की खरीद पर इसकी कीमत पर और अब तक हुई टीकाकरण पर भी कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि केंद्र ने अब तक तीनों वैक्सीन के लिए तारीख सहित कितने आर्डर दिए हैं? कितनी संख्या में वैक्सीन की खरीद हुई है और किस किस तारीख को वैक्सीन की कितनी सप्लाई प्राप्त हुई है? देश में खरीदी गई वैक्सीन की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कीमतें हैं? अब तक देश के कितने लोगों को पहली और दूसरी डोज लगी है? टीकाकरण के तीनों चरणों में अब बाकी रहे लोगों को किस प्रकार से टीके लगाए जाएंगे और ग्रामीण आबादी को अब तक कितने प्रतिशत वैक्सीन लगी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अब तक खरीदी गई कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक टीके का पूरा ब्यौरा भी तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी।


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