फैक्ट्री मालिकों पर कार्यवाही नहीं करने की एवज में 300000 की मासिक बंदी लेते एसीबी की गिरफ्त में आए लेबर कमिश्नर प्रतीक झांझडिया पर एसीबी का शिकंजा कस गया है।


झांझडिया के गांधीनगर स्थित आवास में ली गई तलाशी के दौरान ₹5,37000 नगद और प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं। वही करौली में लेबर इंस्पेक्टर और कार्यवाहक श्रम कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र मीणा के घर की तलाशी में भी 10 लाख 86000 रुपये नगद बरामद किए गए हैं। इधर करौली एसीबी के डीएसपी अमर सिंह ने कलेक्ट्रेट में कमरा नंबर 201 को सील कर दिया। एसीबी का मानना है की इस कार्यालय में मौजूद फाइलों के जरिए कई और भी मामले सामने आ सकते हैं। 


एसीबी को इस खेल में और भी कई कर्मचारियों के लिप्त होने की आशंका है। फिलहाल एसीबी की टीम लेबर विभाग में कार्यरत संविदा कर्मियों सहित अन्य स्टाफ की आय से अधिक संपत्ति और लग्जरी लाइफ जीने के के पीछे हर एंगल को लेकर जांच पड़ताल में जुट गई है। एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है


कि श्रम कल्याण निधि के नाम पर लेबर डिपार्टमेंट की ओर से 1% राशि ली जाती है। लेकिन यह राशि श्रम कल्याण के बजाए सीधे अफसरों की जेब में जाती है फिलहाल एसीबी ने इस मामले में गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों को शनिवार को विशेष कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है।

ब्यूरो रिपोर्ट।