सोचा न था कि दोस्तो ऐसा करेंगे हम
अपना पता ही और से पूछा करेंगे हम
किरदार में ढले तो बड़ी उम्र हो गयी
अब तो हमारी ज़ीस्त को क़िस्सा करेंगे हम
आते रहेंगे हम इन्हीं गलियों में कब तलक
कब तक यूँ अपने आप को रुसवा करेंगे हम
जन्मों के बैर कर लिये सदियों के इश्क़ भी
इक ज़िन्दगी में और अब क्या क्या करेंगे हम
किसको पता है तुझसे बिछुड कर के ऐ रक़ीब
हँसते रहेंगे या कि बस रोया करेंगे हम
देखा है हमने मौत को इतने क़रीब से
"अब ज़िन्दगी को दूर से देखा करेंगे हम"
'साहिल' से कह रहे थे ये कल रात सफ़ीने
दरिया की बात का न भरोसा करेंगे हम
लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'
(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)


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