ब्यूरो रिपोर्ट, देश की शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि केंद्र ने बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सही निर्णय लिया है । अब जिस पैटर्न के आधार पर इनका रिजल्ट तैयार किया जाएगा, उसमें देरी नहीं होनी चाहिए। 


कोर्ट ने इस दिशा में सरकार को 2 हफ्ते का समय देते हुए कहा कि इसी बीच यह निर्णय हो जाना चाहिए कि छात्रों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा। जिससे कि बच्चे आगे की पढ़ाई जारी कर सके। कोर्ट ने सीबीएसई और सीआईएएससीइ दोनों संस्थाओं से पूछा है कि 12वीं के छात्र छात्राओं के अंकों का मूल्यांकन कैसे करेंगे? उन्हें अंक या ग्रेड देने का क्राइटेरिया क्या होगा? जस्टिस खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने यह कहा है 



कि इस बारे में सारी प्रक्रिया तय करने के बाद कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करें। इससे पहले केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि कोरोना के कहर को देखते हुए 12वीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है। इस पर जस्टिस खानविलकर ने कहा, हमें खुशी है कि सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है।