ब्यूरो रिपोर्ट, लगता है कचरा प्रबंधन से जुड़ी कंपनी बीवीजी प्रदेश में भी उस तर्ज पर काम कर रही है जिसे कहा जा सकता है कि जो हमसे टकराएगा, मिट्टी में मिल जाएगा। वर्ष 2017 के दौरान भाजपा शासनकाल में कचरा संग्रहण से जुड़ी, बीवीजी कंपनी प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर के कई निकायों में अपना दबदबा रखती है।
यह कंपनी संसद भवन और राष्ट्रपति भवन से लेकर कई राज्यों की सरकारी एजेंसियों में काम करने का दावा करती रही है। इनमें हाउसकीपिंग से लेकर सफाई व्यवस्था भी शामिल है। भाजपा हो या कांग्रेस या फिर कोई अन्य दल की सरकार। कहा जा रहा है कि इस कंपनी का सभी दलों के प्रमुख लोगों के बीच अनूठा रिश्ता कायम है। इसीलिए जब जब कंपनी के काम को लेकर विवाद की स्थिति बनी तो उसमें कंपनी ही हमेशा हावी नजर आई। प्रदेश में वर्ष 2017 के दौरान बीवीजी कंपनी ने घर-घर कचरा संग्रहण के लिए टेंडर किया। तत्कालीन महापौर निर्मल नाहटा के पास इसकी फाइल आई।
और नाहटा के रहते रहते इसकी फाइल स्वीकृति के लिए सरकार को भेज दी गई। इसके बाद महापौर बने अशोक लाहोटी के कार्यकाल में कंपनी ने काम शुरू किया। उसके बाद विष्णु लाटा महापौर बने। इन दोनों के कार्यकाल में भी कंपनी का कामकाज हमेशा कटघरे में रहा। लाटा ने तो कंपनी पर कार्यवाही की तैयारी भी कर ली थी लेकिन उच्च स्तर के दखल के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए।
एक बार फिर ग्रेटर नगर निगम में कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने की कवायद शुरू हुई तो सियासी हलचल मच गई। राजस्थान से लेकर दूसरे राज्यों के सियासी हलकों में भी यह मामला पहुंचा। इसी बीच निगम के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के चेयरमैनों को बीवी जी के इस मामले से दूर रहने की मौखिक नसीहत भी दे दी गई। जबकि इससे पहले तक सभी चेयरमैन निलंबित महापौर के साथ शहर की बिगड़ी कचरा संग्रहण व्यवस्था के लिए जिम्मेदार मानकर कंपनी को बाहर निकालने का ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे थे।.
लेकिन फिर एक बार उच्च स्तरीय दखल के चलते इस कार्रवाई पर पानी फिर गया। आपको बता दें कि इस कंपनी पर समय समय के दौरान। अनुबंध के अनुसार शर्तों की पालना नहीं करने और निगम के संसाधनों का उपयोग करने के आरोप भी लगते रहे हैं।




0 टिप्पणियाँ