बात तब की है जब श्रीमाधोपुर(सीकर) के कॉंग्रेस विधायक और मेरे मित्र दीपेन्द्र सिंह शेखावत परिवहन और प्लानिंग मिनिस्टर होते थे राजस्थान सरकार में ।


दीपेन्द्र सिंह जी के इसरार पर उर्दू अकादमी राजस्थान ने श्रीमाधोपुर में एक ऑल इण्डिया मुशायरे का आयोजन किया । श्रीमाधोपुर में मुस्लिम आबादी बहुत ही कम है । लेकिन मुशायरागाह पूरा खचाखच भरा हुआ था । लगभग दस-बारह हज़ार लोगों के साथ सामने दरी पर बैठ कर दीपेन्द्र सिंह जी ने पूरी रात मुशायरा सुना । हर अच्छे शे'र को सामईन द्वारा ख़ूब सराहा और नवाज़ा गया । 


मुशायरा शुरू होने से पहले स्वागत-सत्कार की परम्परा में बेहद ख़ूबसूरत मोमेंटोज़ के साथ अकादमी के सचिव मोअज़्ज़म अली ने जो दुशाले शाइरों को दीपेन्द्र सिंह जी हाथों भेंट कराये वे बहुत ही क़ीमती और अच्छी क्वालिटी वाले थे । 






मुशायरा बाक़ायदा शुरू हो चुका था । दूसरा या तीसरा शाइर पढ़ रहा था । अचानक मेरे पास बैठे वसीम बरेलवी बोले "साहिल मियाँ , आप वाले दुशाले का कलर मेरे वाले से बेहतर लग रहा है , आप ठीक समझें तो अपना आपस में बदल लें इन्हें" । मैं वसीम भाई को कैसे मना कर सकता था । हमने दुशाले एक्सचेंज कर लिये । 


मुशायरा चलता रहा । मेरे दूसरी तरफ़ मौज रामपुरी बैठे थे । वे हर बीस-तीस मिनट में धीरे से मेरे कान में बोलते "साहिल साहब , कलर तो वो ही अच्छा था" । नूरजहां सरवत ने तुरन्त मौज भाई की बात की ताईद की । मैंने मौज भाई की बात सुनी और मुस्कुरा दिया । 


मुशायरा ख़त्म होने तक मौज भाई मुझे बार-बार उस दुशाले का रंग याद दिला कर छेड़ते रहे और मैं मुस्कुराता रहा । 


तस्वीर उसी मुशायरे की है जिसमें मख़मूर सईदी , निदा फ़ाज़ली , बेकल उत्साही , मौज रामपुरी , वसीम बरेलवी , अज़हर इनायती , इक़बाल अशहर , पॉपुलर मेरठी आदि मित्र मेरे क़लाम पर बोर होते साफ़ देखे जा सकते हैं ।



लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'

(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)