मत क़दम आगे बढ़ाओ यह समय प्रतिकूल है

पाँव को धीरज बँधाओ यह समय प्रतिकूल है


तुम भी इस प्रतिकूलता को ठीक से अब लो समझ

और फिर सबको सिखाओ यह समय प्रतिकूल है 


अब न कलियों में रहा है वो पुराना सा लिहाज

कोई भँवरों को बताओ यह समय प्रतिकूल है


इक वबा ने क़ुर्बतों में फ़ासले भर ही दिये

तुम भी घर में बैठ जाओ यह समय प्रतिकूल है


सुन रहे थे लोग तुमको जब समय अनुकूल था

अब न वे बातें बनाओ यह समय प्रतिकूल है


अब घड़ी की सूइयाँ भी चल रहीं उल्टी तरफ़

वक़्त पर नज़रें जमाओ यह समय प्रतिकूल है


मौज ने 'साहिल' को चुपके से इशारा कर दिया

मत नदी को आज़माओ यह समय प्रतिकूल है 


लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'

(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)