विगत 16-17 महीने से राज्य सरकार कोरोना प्रबंधन में व्यस्त है। स्वास्थ्य विभाग के अलावा जीवन के जरुरी विभाग ही सक्रीय हैं। ऐसा ही एक विभाग है जलदाय विभाग जिसका राजस्थान के परिपेक्ष्य में महत्त्व किसी से छिपा नहीं है। पिछले कुछ समय से इस विभाग की जिम्मेदारी ACS सुधांत पंत के पास है। अगर एक लाइन में बात की जाए तो रूटीन कार्य के अल्वा यह विभाग महत्वपूर्ण योजनाओं में फिसड्डी साबित हो रहा है। ACS सुधांत पंत सचिवालय से VC के माध्यम से अधिकारीयों को निर्देश दे देते हैं लेकिन अधिकारी हैं कि सिर्फ टेंडर करने में व्यस्त हैं। आखिर इसी में पूरे सिस्टम का भला भी है। जनता को तो आदत है पानी की किल्लत की। अधिकारीयों के इसी रव्वैये के चलते प्रदेश जल जीवन मिशन में धराशाई है। मुख्य सचिव निरंजन आर्य केंद्र के अधिकारीयों के साथ VC में चाहे जैसे भी प्रदेश की इज्जत बचाते हों पर ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि मिशन शुरू होने से पहले प्रदेश में 11.74 लाख नल कनेक्शन थे और मिशन शुरू होने के बाद 8.15 लाख कनेक्शन और जोड़े गए। जल जीवन मिशन यानि हर घर नल का पाणिं पहुंचाने में राजस्थान देश में 29वें स्थान पर है।
सिर्फ झारखंड,लद्दाख,कर्नाटक और छत्तीसगढ़ ही राजस्थान से पीछे हैं। राजस्थान के एक भी जिले में 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ है। 9 जिलों में ही 25 फीसदी से अधिक काम हो पाया है। राजसमंद, हनुमानगढ़, पाली, नागौर, जयपुर, सिरोही, जालोर, भीलवाड़ा व चूरू में 25 फीसदी से ज्यादा काम हुआ पर 9 जिलों में 10 फीसदी भी काम अब तक नहीं हुआ। डूंगरपुर, बाड़मेर, बारां, दौसा, धौलपुर, बांसवाड़ा, भरतपुर, प्रतापगढ़ व जैसलमेर इस मामले में सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं। यहाँ तक कि केंद्रीय जल शक्ति मानती गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में 17.34 फीसदी ही काम हो सका है। हालत यह कि 12 जिलों में तो 5 फीसदी भी काम नहीं हो सका है। जलदाय विभाग की कार्यक्षमता इस बात से समझी जा सकती है कि जलदाय मंत्री बीडी कल्ला के जिले बीकानेर में 5.08 फीसदी काम ही हो पाया है।



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