केंद्र सरकार की ओर से सभी आयु वर्ग के लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाने की घोषणा के बाद विधायकों ने राज्य सरकार की ओर से लिए गई 3 करोड़ की राशि वापस देने की मांग की थी। केंद्र सरकार की घोषणा से पहले राज्य सरकार ने 18 प्लस आयु वर्ग के लोगों के वैक्सीनेशन के लिए विधायकों से प्रति विधायक 3 करोड़ की राशि ली थी। इस तरह राज्य सरकार ने 200 विधायकों से 600 करोड़ रुपए जुटाए थे।

  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हर विधायक को यह राशि लौटाने की लिए स्वीकृति दे दी थी गहलोत ने 20 जून को अपने बयान में कहा था कि विधायकों को यह राशि लौटाई जाएगी लेकिन चिकित्सा गाइडलाइन के साथ उनको अपने क्षेत्र में इसका उपयोग चिकित्सा संसाधनों को बढाने में करना होगा। दूसरी ओर प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग ने भी 209 करोड रुपए के उपयोग के लिए भी गहलोत को प्रस्ताव भेजा है। 

यह राशि विधायक कोष में रखी हुई है, जो कि पिछले कई सालों से खर्च नहीं की गई थी। वर्ष 1999-- 2000 से 2018-- 19 तक लगभग 4 विधानसभा कार्यकाल के दौरान प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विधायक कोष की राशि बची हुई थी। विधायक कोष नियमों के अनुसार यह राशि नॉन लैप्सेबल होती है। यानी कि एक विधायक का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह समाप्त नहीं मानी जाती लेकिन इसका उपयोग सरकार की मंजूरी के बाद ही हो सकता है। 

पिछले दिनों ग्रामीण विकास विभाग ने सभी क्षेत्रों से ऐसी ही बची हुई राशि का आंकलन करवा कर 209 करोड रुपए के उपयोग के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रस्ताव भेजा है। यदि इस बारे में मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिल जाती है तो हर विधायक को अब 3 के बजाय 4 करोड रुपए मिलेंगे। लेकिन विधायक को इस राशि का उपयोग सरकार की ओर से तय की गई गाइडलाइन के अनुसार ही करना होगा

ब्यूरो रिपोर्ट।

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