कोटा से हंसपाल यादव की रिपोर्ट।  

चम्बल नदी किनारे सबसे पुराने बिजलीघर की स्थापना 1983-84 में 110-110 मेगावाट दो इकाइयों से हुई थी, उनसे 38 वर्ष से लगातार निर्बाध रूप से सस्ती दरों पर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। 1984 से कई वर्षों तक कोटा थर्मल को लगातार सर्वश्रेष्ठ उत्पादकता पुरस्कार भी मिलता रहा है। लेकिन राज्य सरकार ने अचानक आदेश जारी करके 30 जून से दोनों पुरानी यूनिटों को चरणबद्ध ढंग से बंद करने के आदेश जारी कर दिये हैं। इससे कोटा थर्मल के अभियंताआंे, कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों सहित शहर के नागरिकों एवं व्यापारियों में आक्रोश फैल गया है। यह निर्णय कोटा शहर पर बिजली गिराने के समान है। 

उल्लेखनीय है कि उर्जा विभाग की संयुक्त सचिव अनुपमा जोरवाल ने 17 जून को विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी को आदेश जारी कर निर्देश दिये कि राज्य सरकार ने कोटा थर्मल को इकाई-1 एवं 2 को 30 जून,2021 से चरणबद्ध ढंग से बंद करने की स्वीकृति प्रदान की है।    

कोटा उत्तर के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि कोटा थर्मल पर आज भी शहरवासियों को गर्व है। नदी पार क्षेत्र में कोटा थर्मल से ही विकास एवं सुख-समृद्धि के दरवाजे खुले हैं। इससे शहर में सभी वर्गां को रोजगार मिला है। साथ ही शहर की अर्थव्यवस्था को हमेशा सबंल मिला है। जब-जब प्रदेश में बिजली संकट पैदा हुआ, कोटा थर्मल की पुरानी इकाइयों ने निरंतर विद्युत उत्पादन कर नया इतिहास रचा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय कोटा बिजलीघर को बेचने की अफवाहें उडाई गई थी, उन्होंने विधानसभा में यह सवाल उठाया था। तब उन्हें लिखित जवाब दिया गया था कि कोटा थर्मल को 2025 तक बंद करने की कोई योजना नहीं है। इसके पश्चात् कोटा थर्मल की सभी इकाइयों को चलाने के लिये 2024 तक पर्यावरणीय स्वीकृति भी जारी की गई है।

कांग्रेस सरकार की 38 वर्ष पुरानी चालू विद्युत इकाइयों को बंद करने की योजना थी, तो पिछले चार वर्षों में इनके नवीनीकरण पर करोडों रूपये क्यों खर्च किये गये। इस बर्बादी के लिये कौन जिम्मेदार है?

कांग्रेस सत्ता में आई तो थर्मल बंद नहीं होने देंगे?

कोटा उत्तर के विधायक एवं नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने 2017-18 में कोटा थर्मल के मुख्य द्वार पर आंदोलित थर्मल कर्मचारियों एवं श्रमिकों से वादा किया था कि कांग्रेस सत्ता में आई तो कोटा थर्मल को कभी बंद नहीं होने दिया जायेगा। आज कांग्रेस सरकार दो इकाइयों को बंद करने जा रही है तो शहर की औद्योगिक बदहाली का जिम्मेदार कौन होगा। कोरोना महामारी के दौरान प्रत्येक परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। फुटकर व्यापार-व्यवसाय ठप हो गये हैं ऐसे संकट काल में नया उद्योग लगाने की जगह चालू उद्योग को बंद करने का निर्णय शहर की जनता पर तलवार चलाने के समान है।

वर्तमान में राजस्थान का गौरव कहलाने वाले कोटा थर्मल की सात इकाइयों से 1240 मेगावाट क्षमता से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। इनमें से फिलहाल पांचवी इकाई वार्षिक मरम्मत के लिये बंद है। चम्बल किनारे 204 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बिजलीघर का संयंत्र है जबकि 423 हैक्टेयर भूमि में राख संग्रहण क्षेत्र है, जहां फ्लाई एश को एकत्रित किया जाता है। इतने लम्बे-चौडे़ भूभाग पर राज्य सरकार ने सौर उर्जा संयंत्र स्थापित करने की कोई योजना तक नहीं बनाई, उल्टे चालू इकाइयां बद करने के आदेश जारी कर दिये हैं, जिसका शहरवासियों ने कडा विरोध किया है।